शनिवार, 10 अगस्त 2013

इलाहाबाद अपराध नगरी की कथा

 प्रिय  दोस्तों ,

 काफी  समय के  बाद   आप  सब  के सामने   आया  हूँ , दोस्तों  उत्तर  प्रदेश   बहुत ही   ख़राब  है  हमारी  जमीन  पर लोगो  के  साथ  मिलकर  सपा  के गुंडे   वीर चंद  यादव , पंकज  कुमार  झा और , पदमेंद्र  कुमार झा , थाना अधिकारी , और  कुछ  लोग  मिल  जबरन , रस्ते  का निर्माण  करा दिए  है जिसका  विरोध  करने  पर मुझे  जान  से  मारने  की धमकी  दी   जा  रही  है , और  बोला  जाता  है जिसके जिसके  पास  जितनी  बार  जावोगे  उतनी  जमीन  और  कब्ज़ा करेंगे , इसमें  उप जिलाधिकारी  करछना , औद्योगिक  छेत्र  पुलिस , और मेरे  गाँव  के लोग  मिल कर  जबरन  निर्माण  कराये है , मेरे   घर  वालो को  मारा  पिटा  जा रहा  है , और  हमारी  शिकायत  तक  दर्ज  नहीं  की  जा  रही है , भविष्य  में मुझे किसी भी  मामले  में फ़सा  कर  जेल  भेजा  जा  सकता  है , या  मेरी  हत्या  तक  कराई  जा  सकती है , यदि  भविष्य  मेरे  साथ  कुछ भी  होता  है तो  उसके  जिम्मेदार , वीर  चंद यादव ,पंकज  कुमार झा ,उनका  परिवार  और , पदमेंद्र  कुमार झा होंगे  साथ  में  इन्हें  पूरा  सहयोग  देंगे , हमारी  पुलिस  के लोग   जो  आज  मेरे साथ  अन्याय  कर  रहे  है /

राहुल  मिश्र




गुरुवार, 2 अगस्त 2012

न्यवाद  साथियों , 
आज  रक्षाबंधन  का  त्यौहार पुरे  देश  में हर्सोल्लास  के साथ मनाया जा रहा  है तो , एक तरफ देश  को   एक नयी आजादी दिलाने  के लिए श्री अन्ना  हजारे  जी जंतर मंतर पर  आन्दोलन रत है / देश के  हित में अन्ना जी का  समर्थन करे , जब तक  पूरा देश नहीं खड़ा होगा तब तक जन लोकपाल तो दुर , हमें जरुरी  सामानों की भी  वस्तुए  मिलनी दुर्लभ हो जाएँगी , आप खुद देखे  देश में  बढाती महगाई  किसका नतीजा है देश  में हुए अब  तक के  घोटालो का , इसलिए  समय है , आने वाले लोगो के लिए  एक नया भारत  बनाये , चलो भारत से महगाई भगाए  और ये  तभी संभव  है जब हम  खुद अन्याय और  अत्याचार , कालाबाजारी , का समर्थन नहीं करेंगे ,  आज योजना आयोग का सलाहकार कौन है जिसे ये  भी नहीं पता की भारत की आधी आबादी आज भी , भर पेट भोजन नहीं कर पा रही है , माध्यम वर्ग  घर की जरूरतों को पूरा करने में अपनी पूरी जिंदगी  लगा दे रहा है , पर अपनी एक बेटी का हाथ पीला  करने में  उसे भी कर्जा लेने पद रहे  है , आखिर  हम कब बदलेंगे , कब तक , उत्तर प्रदेश , हरियाणा , और महारास्त्र  की लड़ाई में उलझे रहेंगे  अब तो  जागो चलो देश बचावो , वर्ना  वो शहीद आत्माए  हमें धिकारे गी /
धन्यवाद 

भारतीय  एकता संगठन 

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

एक सन्देश साथियों को

साथियों , भारतीय एकता संगठन का लक्ष्य हमेशा आप सब को साथ लेकर चलने का रहा है / संगठन हमेशा इसप्रयास में रहा है की आप सब साथियों के सहयोग से ही कोई कार्य किया जाये परन्तु कुछ दिनों से ये आभास किया जा रहा है की संगठन के कुछ कार्यकर्ता संगठन के नियमो की अवहेलना कर रहे है / जो की एक गंभीर मुद्दा है / संगठन कोई राजनितिक मंच नहीं है / बल्कि ये संगठन हर उस इन्शान के लिए है जो
भारत को ,भारतीयता को ,सम्मान करता है / हमारा उद्देश्य किसी को दुख पहुचानानहीं है बल्कि हर दुखी चेहरे पर खुशिया लाना है / और ये तभी हो सकता है / जब हम सब एक होकर पूरी ईमानदारी से अपने कार्य को अंजाम देंगे / तो इसलिए दोस्तों हर भेद भाव को भुला कर केवल अपने कार्य पर ध्यान दो ।

भारतीय एकता संगठन

सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

सबसे आगे होंगे हिंदुस्तान

गणतंत्र दिवस की साठवीं वर्षगांठ भारतीय कंपनियों के साथ-साथ युवाओं के लिए जबर्दस्त खुशियां लेकर आई है। खुशी इस बात को लेकर कि अमेरिका सहित पूरी दुनिया जहां अभी तक मंदी के प्रभाव से नहीं उबर सकी है, वहीं भारतीय कंपनियों ने न केवल अपना वजूद बनाए रखा है बल्कि आशा के विपरीत काफी ग्रोथ भी की है। ऐसे में भारतीय युवाओं को रिसेशन को लेकर चिंतित होने की जरूरत इसलिए नहीं है, क्योंकि भारी मुनाफा कमा रही भारतीय कॉरपोरेट कंपनियों ने पहले की तरह एक बार फिर स्किल्ड युवा प्रोफेशनल्स को भारी-भरकम पैकेज पर जॉब ऑफर करना आरंभ कर दिया है। इसका नमूना इन दिनों अधिकांश शैक्षणिक संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट के लिए पहुंच रही कंपनियों की बढती गतिविधियों के रूप में देखा जा सकता है। यही कारण है कि पिछले वर्ष जहां अधिकांश संस्थानों (तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों तक के भी) के प्लेसमेंट सेंटर्स ठंडे पडे हुए थे, वहीं इस साल की शुरुआत से ही वहां रौनक बढ गई है। हाल यह है कि भले ही अंतिम सेमेस्टर समाप्त होने में अभी कई माह बाकी हों, लेकिन कंपनियों ने रिटेन एग्जाम और इंटरव्यू लेकर भर्ती किए जा सकने वाले स्टूडेंट्स को शॉर्टलिस्ट कर लिया है। आईटी, कॉमर्स, इंजीनियरिंग आदि के इन स्टूडेंट्स को सालाना पैकेज चार से दस लाख रुपये या इससे अधिक ऑफर किया जा रहा है।
कंपनियों की पौ बारह
अगर भारत की तमाम बडी कंपनियों के ताजा आंकडों पर गौर करें तो पाएंगे कि प्राय: सभी ने उम्मीद से बेहतर मुनाफा दर्ज कराया है। देश की सबसे बडी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (टीसीएस) के सीईओ एन. चंद्रशेखरन के अनुसार, दिसंबर 2009 में समाप्त तिमाही के लिए कंपनी का शुद्ध लाभ एक साल पहले की तुलना में 34 फीसदी बढकर 1,824 करोड रुपये हो गया और कंपनी ने समग्र रूप से सभी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं, अन्य बडी आईटी कंपनियां, जैसे-इंफोसिस, विप्रो भी मुनाफा कमाने में पीछे नहीं रही हैं। इसके अलावा, भारतीय बैंकिंग सेक्टर, इंश्योरेंस, एफएमसीजी, रिटेल, इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित कंपनियां भी मुनाफे की राह पर आगे बढती रही हैं। विप्रो ने जहां मुनाफे में 21 फीसदी बढोत्तरी दर्ज की, वहीं एचडीएफसी ने 31, आईडीबीआई ने 29 और यूको बैंक ने 43 फीसदी मुनाफा कमाया। ये तो चंद उदाहरण हैं। मुनाफा कमाने वाली भारतीय कंपनियों की लिस्ट बहुत लंबी है।
पीपीपी ने दिखाई राह
एक तरफ अमेरिका सहित दुनिया की तमाम कंपनियां जहां दिवालया हो रही थीं और बडे-बडे बेलआउट पैकेज भी उन्हें मंदी के दलदल से नहीं निकाल पा रहे थे, वहीं भारतीय कंपनियों ने सरकार के साथ कदम से कदम मिलाते हुए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी के तहत ऐसी मजबूत दीवार खडी की, ताकि किसी भी कंपनी पर मंदी की मार न पड सके। इसी का नतीजा है कि बी. रामलिंगम राजू की काली करतूतों से डूबी कंपनी सत्यम को उबारने में मदद मिली और आज यह कंपनी महिंद्रा-सत्यम के नाम से एक बार फिर खुद को खडा करने में कामयाब हो पा रही है।
जॉब मार्केट में नं.1
देश की तमाम दिग्गज कंपनियों की बेहतर आर्थिक स्थिति ने उन्हें फिर अपने कुशल कर्मियों की संख्या बढाने के लिए प्रेरित किया है। यही कारण है कि अधिकांश पुन: प्रतिभाशाली भारतीय युवाओं को आकर्षक जॉब के अवसर उपलब्ध कराने के लिए आगे आने लगी हैं। वैसे अगर दुनिया के अन्य देशों से तुलना की जाए तो यह साफ हो जाता है कि रिसेशन के दौर में भी भारत जॉब मार्केट में नंबर वन बना रहा। और अब तो इसमें और ग्रोथ दिखने लगी है। यहां तक कि मंदी की मार से सबसे अधिक प्रभावित रहा आईटी सेक्टर भी फिर से रोजगार उपलब्ध कराने लगा है। ताजा आंकडों के मुताबिक फिलहाल करीब 70 प्रतिशत भारतीय कंपनियां नई भर्तियां कर रही हैं। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ माह में देश की एक चौथाई कंपनियां बडे पैमाने पर नियुक्तियां करेंगी। स्पष्ट है कि जॉब के मामले में यह आशावादिता भारतीय निजी कंपनियों और सरकारी प्रतिष्ठानों की मजबूती से सामने आई है।
दुनिया में भी दिखा दबदबा
देखा जाए तो भारतीय कंपनियों और युवा प्रतिभाओं का दबदबा देश ही नहीं, पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है। दुनिया की तमाम बडी कंपनियों के ड्राइविंग स्टॉफ पर नजर दौडाई जाए तो पता चलता है कि उनमें से अधिकांश भारतीय ही हैं। उदाहरण के लिए सॉफ्टवेयर बनाने वाली दुनिया की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की ग्लोबल मैनेजमेंट टीम के आला अधिकारियों की सूची में एक चौथाई भारतीय ही हैं। यही स्थिति तमाम मल्टीनेशनल कंपनियों की है।
सरकारी सेक्टर भी नहीं है पीछे
जॉब उपलब्ध कराने के मामले में देश का सरकारी सेक्टर भी कहीं से पीछे नहीं रहा है। एक तरफ जहां दुनिया के अधिकांश देशों का बैंकिंग सेक्टर डूब रहा था, वहीं दूसरी तरफ भारतीय बैंकिंग सेक्टर न केवल आगे बढ रहा था बल्कि जोर-शोर से नई नियुक्तियां भी कर रहा था। यह सिलसिला अभी भी जारी है। भारत का सबसे बडे कॉरपोरेट इम्प्लॉयर भारतीय स्टेट बैंक ने पिछले वर्ष 27 हजार नई नौकरियां दीं और भर्तियों का सिलसिला बरकरार रखा है। बीएचईएल 2012 तक अपने कर्मचारियों की संख्या बढाकर 50 हजार करने वाला है। इंफ्रास्ट्रक्चर से जुडी कंपनियां भी बडे पैमाने पर जॉब मुहैया करा रही हैं।
रहें हरदम तैयार
भारतीय कंपनियों की दमदार उपस्थिति देखते हुए युवाओं को भी उपयुक्त जॉब के लिए खुद को अच्छी तरह तैयार रखना चाहिए। कंपनियों को ऐसे वेल-स्किल्ड प्रोफेशनल्स की तलाश रहती है जो उनका और देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर सकें। तो फिर देर किस बात की..। अगर आप समझते हैं कि मुश्किल से मुश्किल काम भी आसानी से कर सकते हैं, आपके पास एक से एक आइडियाज हैं, आप अपने फन में माहिर हैं और अपनी निर्णय क्षमता से सबको मुरीद बना सकते हैं तो इस गणतंत्र दिवस पर आपके खुश होने के पर्याप्त कारण हैं..क्योंकि आपमें है दम!

ऐशा बॉस से कभी न बोले

अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने कहा था-लीडर लीड करते हैं, लेकिन बॉस संचालक होते हैं। भले ही आप किन्हीं वजहों से बॉस से खफा रहते हों, लेकिन एक दिन आप भी इस बात को जरूर महसूस करेंगे। वास्तव में, बॉस आपकी तरक्की से काफी करीब से जुडे होते हैं। मतलब साफ है कामकाजी संबंधों में बॉस के साथ आपको बेहद संजीदा तरीके से डील करना होगा। उनसे क्या कहना है? यह अपनी जगह है, लेकिन बॉस से क्या नहीं कहना है, यह एक बडा सवाल है। आइए जानें कि बेहतर रिलेशनशिप के लिए बॉस से क्या नहीं कहना चाहिए और क्यों?
यह मेरा काम नहीं है
यदि आपको कुछ काम दिया गया है, जो आपके रूटीन-वर्क या जिम्मेदारी में शामिल नहीं है, उसे मना नहीं करें। यह कहकर कि यह मेरा काम नहीं है। बॉस को आपकी योग्यता का पता होता है। इसलिए उनके दिए गए अतिरिक्त टॉस्क का हंसकर स्वागत करें और उसमें अपना बेस्ट देने का प्रयास करें।
अच्छा नहीं लग रहा है
यदि एक नियत डेडलाइन के साथ आपको काम दिया गया है, तो उसे स्वीकार करें। उस स्थिति में भी जब आपको लग रहा हो कि उस डेडलाइन में आप काम करने में समर्थ नहीं हैं। लेकिन बॉस मैं अच्छा महसूस नहीं कर रहा हूं, यह मुझसे नहीं होगा, इसका अर्थ यही कि आपको मौका मिला, लेकिन आपने उसे गंवा दिया!
बॉस, आप गलत हैं
यह पंक्ति कि बॉस इज ऑलवेज राइट, आप भी जानते होंगे। लेकिन यदि इसके उलट आप कुछ महसूस कर रहे हैं, तो कंट्रोल योर सेल्फ। कभी मत कहें कि बॉस आप गलत हैं!
और भी लोग गलत करते हैं
आपसे कुछ गलती हुई, तो यह सामान्य बात है। गलती सबसे होती है, उसे बिना किसी ईगो के सहजता से स्वीकार करें, लेकिन ये क्या आपने गलती की और बॉस से जवाब मांगने पर यह कह दिया कि सर मेरे अमुक कॅलीग ने भी तो यही गलती की थी। ऐसा कहकर आप खुद को और गलत साबित करने के साथ-साथ बॉस की नजर में भी अपनी छवि खराब करते हैं।
मुझे कोई आइडिया नहीं है
आप एक समर्पित और इंटेलिजेंट एम्प्लॉई भी हैं। यह बात आपके बॉस को भी पता है। इसलिए एक दिन उन्होंने आपसे किसी मसले पर कुछ आइडिया मांगा। पर उस बात को बिना कोई महत्व दिए ही आपने कह दिया कि बॉस मुझे कोई आइडिया नहीं है, तो ध्यान रहे, एक और गलती कर रह हैं आप।
सौजन्य से -दैनिक जागरण

मंगलवार, 8 दिसंबर 2009

मरती संवेदना

क्लॉस में काफी हंसी खुशी का वातावरण था। सभी काफी गंभीरता के साथ सर का लेक्चर समझने का प्रयास कर रहे थे। परन्तु पता नहीं, ये किसका दोष था- अध्यापक का, छात्र-छात्राओं का, सेलेबस का या पढ़ाने के लिए प्रयोग की जा रही विधियों का, कि न तो पढ़ाने वाले को ये समझ आ रहा था कि वो क्या पढ़ा रहा है और न ही पढ़ने वालों को ही पता लग रहा था कि वे क्या पढ़ रहे है।
लेकिन फिर भी क्लास में हंसी-खुशी का माहौल था। ये शायद उम्र का दोष भी हो सकता है कि इस उम्र में अध्यापक पढ़ाने के लिए रसहीन हो जाते हैं और छात्र..। छात्रों के पढ़ने के मूड से तो सभी वाकिफ है। असल में ये क्लॉस थी बी.टेक. सेकण्ड सैम की। और मैं इस कक्षा की निर्जीव बैंच हूं।
इस क्लास में मैं सभी कुछ ध्यानपूर्वक देखती हूं। आप मुझे एक चश्मदीद गवाह भी कह सकते है। इस कक्षा में घटने वाली हर घटना की साक्षी। वैसे सच कहूं तो मुझे ये क्लास बहुत पसंद है। क्योंकि इस क्लास के सभी बच्चे भले है। एक-दूसरे की सहायता के लिये हमेशा तत्पर रहते है। एकता की भावना का बेहतरीन उदाहरण इस क्लास में आपको मिल जायेगा।
हालांकि पांचों अंगुलियां एक समान नहीं होती। कुछ छोटी-छोटी बातें तो होती ही रहती है पर फिर भी मुझे इस क्लास पर पूरा भरोसा है।
मेरे ऊपर तीन लड़के बैठे हुए थे- राहुल, सुधांशु और संदीप। तीनों ही पढ़ने में बहुत अच्छे है। संदीप इस शहर का नहीं है। वह लखनऊ निवासी है। लखनऊ से संबंधित होने के कारण ही उसकी बोली इतनी मीठी है कि मेरा मन बस उसे ही सुनते रहने को करता है। 'हम कह रहे है ना, आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।' 'ये सर तो क्या पढ़ा जाते है, हम कुछ समझ ही नहीं पाते है।' उसकी ऐसी-ऐसी बातें मेरे भी मन में मिठास घोल देती है। पतला-दुबला सा संदीप यहां अपने बचपन के दोस्त के साथ कमरा किराये पर लेकर रहता है। वह अक्सर बीमार रहता है। परन्तु अन्तर्मुखी होने के कारण किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता। आज भी वह कुछ अस्वस्थ ही लग रहा था।
सर का लेक्चर आगे चल रहा था परन्तु पहली बैंच से आखरी बैंच तक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का विषय भिन्न-भिन्न था। निशा अपना असाइन्मेंट पूरा कर रही थी क्योंकि यदि आज जमा नहीं हुआ तो नम्बर नहीं मिलेंगे। आकाश किसी दूसरे विषय की पढ़ाई में तल्लीन था, उसे सर के लेक्चर में मजा नहीं आ रहा था। पूजा अक्सर फोन पर व्यस्त रहती है और आज भी क्लास में वो वही कर रही थी। बहुत हिम्मत वाली लड़की है पूजा। उसे किसी से डर नहीं लगता। अजय एस एम एस का बहुत शौकीन है। इसलिए वो एस एम एस ही कर रहा था। कोई क्लास में ऐसा भी था जो सो रहा था। रीना को भी बहुत तेज नींद आ रही थी। पूरी क्लास इसी प्रकार की पढ़ाई में गंभीरता से व्यस्त थी।
पर फिर भी क्लास में पढ़ाई चल रही थी। संदीप को भी अब तो शायद नींद आने ही लगी। वह धीरे-धीरे अपना सिर मुझ पर रखने लगा और अन्तत: मुझ पर लेट ही गया। लेकिन ये तो.. अरे! ये क्या! ये तो अचानक बराबर में बैठे सुधांशु पर गिर गया। '- क्या हुआ संदीप? तुम ठीक तो हो?'
'सर! संदीप बेहोश हो गया।'
पूरी क्लास में हड़कंप मच गया। यह अचानक संदीप को क्या हुआ? मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा था। बस चारों ओर छात्र-छात्राओं की भीड़ दिखाई दे रही थी जो केवल संदीप को देखती हुई 'क्या हुआ? क्या हुआ?' का राग अलाप रही थी। तभी सर आ गये..
'क्या हुआ? कौन है ये लड़का? इसी क्लास का ही है क्या? कैसे बेहोश हो गया?'
दूर खड़े होकर सर ने प्रश्नों की बौछार तो खूब की परन्तु उसको (संदीप को) भली-भांति लेटाने के लिए एक कदम न बढ़ा सके। मैं समझ नहीं पा रही थी कि ये इस कक्षा के जिम्मेदार अध्यापक हैं या कोई तमाशबीन?
यह अध्यापक की ही जिम्मेदारी होती है कि यदि किसी विद्यार्थी को किसी प्रकार की कोई भी परेशानी हो तो उसे 'प्राथमिक चिकित्सा' उपलब्ध करायी जाये।
पर ये तो एक मूकदर्शक की भांति खड़े हो गये थे। - 'सर! डायरेक्टर सर को फोन कर दीजिए। संदीप को हॉस्पिटल ले जाना चाहिए।' सुधांशु ने कहा। - 'ठीक कहते हो तुम। यही करना चाहिए। अभी करता हूं। पर पहले देखना जरा इसकी जेब में कोई फोन है क्या? वो क्या है न मेरे फोन में बैलेंस नहीं है और कॉल रेट भी मंहगी है।'
(छी! कितनी ओछी बात कर रहे थे वे सर। शर्म आती है यो सोचकर भी कि आज के हमारे कुछ अध्यापक कितने गैर जिम्मेदार है।)
'- हां सर, फोन तो है। ये लीजिए!' राहुल ने संदीप का फोन सर को दे दिया।
(नम्बर मिलाने के बाद...)
- 'हां सर, मैं बोल रहा हूं। जी हां, जी हां। हां सर, सब ठीक है। आपकी कृपा है। और घर में सब ठीक है ना, भाभी जी, बच्चे? क्या कर रहे है आजकल? ओहो, बहुत बड़े हो गये है। हां जी। वो आज आपकी बहुत याद आ रही थी तो सोचा बात ही कर लूं। जी सब आपकी मेहरबानी है। जी सर, एक छोटी सी दिक्कत है। नहीं-नहीं ज्यादा घबराने वाली बात नहीं है। मेरी क्लास में एक लड़का बेहोश पड़ा है। हां, पता नहीं क्या हुआ। आप तो जानते ही है इन लड़कों को। किया होगा कुछ नशा वगैरह। हां-हां ज्यादा परेशान न होएं, मैं देख लेता हूं। आप आराम से आ जाइये। ओके साहब नमस्कार!' (मैं यह सोच रही थी कि क्या भाभी जी व बच्चे उस बेहोश पड़े इंसान से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गये है। मरते हुए व्यक्ति के लिए इनके मन में कोई संवेदना नहीं है। और जिस विद्यार्थी की पहचान तक वे नहीं कर पा रहे थे, उस पर नशा करने का आरोप लगा रहे है!)
तभी एक अन्य सर प्रवेश करते है।
- 'क्या बात है सर जी, आज क्लास नहीं छोड़नी है क्या? अजी बहुत तेज भूख लगी है। अब चलिए भी। और ये क्या इन छात्रों के बीच ऐसे क्यों घिरे खड़े है। क्या हुआ?'
- 'कुछ नहीं जनाब, ये लड़का बेहोश हो गया है। अरे भई कुछ करो आप लोग (छात्रों को कहते हुए)। इसके रिश्तेदारों को बुलाओ।' और ये कहते हुए वे दोनों क्लास से बाहर चले गये।
पर ये क्या! इस क्लास के बच्चे भी अपने-अपने काम में व्यस्त हो गये। एक झलक देखिए-
निशा: अरे चल सुनीता, अच्छा मौका है जल्दी से असाइन्मेंट पूरा कर लेते है। थैंक्यू संदीप! बस थोड़ी देर और बेहोश रहना। जल्दी चल सुनीता, तुझे भी तो अपना काम पूरा करना है।
पूजा: (फोन पर) हाय मोहित। कैसे हो? नहीं क्लास नहीं हो रही है। वो संदीप बेहोश हो गया। मैंने सोचा जब तक वो बेहोश है तब तक तुमसे ही बात कर लूं। कहां हो अभी..
आकाश, (अजय से)- यार मैं तो घर जा रहा हूं। वैसे भी कोई पढ़ाई नहीं हो रही। और मुझे तो अब बहुत तेज नींद आ रही है।
(हे भगवान! मेरा इस क्लास के लिए जो भ्रम था वो टूट गया। क्या वाकई ये वो ही क्लास है जो मैंने अब तक देखा था वो हंसते-गाते खुशी के पल थे। पर आज जब मुसीबत में कोई है तो एक-एक व्यक्ति का असली रूप दिखाई पड़ रहा है।)
शायद वो सब मेरी गलतफहमी थी। और सच यही था। आज का इंसान वाकई इतना पत्थर दिल, इतना स्वार्थी हो गया है? लोगों के दिलों से प्रेम, दया, सौहार्द के भाव समाप्त हो गये है! एक दूसरे से मिलने पर किया गया व्यवहार मात्र दिखावा है। लोग दो-दो चेहरे लेकर जीने लगे है। निजत्व की भावना ने परोपकार जैसे खब्दों को अर्थहीन कर दिया। सोचना होगा!!!
आज ये सब देखकर मुझे ऐसा लग रहा है मानो मैं कोई सुनहरा सपना टूटने के कारण अचानक जग गई हूं। वो सपना जिसमें मैं अपने आस-पास अच्छे लोगों को देख रही थी, जिसमें मैंने खुशियां देखी, जिसमें मैंने लोगों के बीच उमड़ते प्रेम को देखा, जिसमें मैंने एक-दूसरे के लिए प्राण न्यौछावर करते देखा। पर जब सपना टूटा तो वास्तविकता जानकर बहुत दुख हुआ। कुछ भी वैसा नहीं रहा अब हमारे समाज में। यहां सिर्फ लोग अपना स्वार्थ साधने पर आमादा है। लोग सिर्फ अपने लिए जीने लगे है। दूसरों का दुख-दर्द उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। दूसरों के जलते झोपड़े पर अपनी रोटी सेंकने का हुनर आज के इंसान ने बखूबी सीख लिया है।
पर इस प्रकार का जीवन हमें किस दिशा में ले जा रहा है? क्या ये विनाश की ओर बढ़ते कदम नहीं है? क्या मरती संवेदनशीलता व मरती इंसानियत मरते समाज की पहली सीढ़ी नहीं है? क्या ऐसी भावनाएं हमें इंसान कहने का हक प्रदान करती है।
संदीप आधे घंटे बेहोश पड़ा रहा। इस आधं घंटे में सभी ने अपने-अपने जरूरी कार्य समाप्त कर लिए। पर किसी ने भी संदीप की सुध न ली...
सुमीर तोमर की कलम से

चेहरे के अनुरूप चुने ज्वेलरी

अगर आपका चेहरा गोलाकार है तो आपको लांग ड्रॉप इयररिंग्स पहने चाहिए, बजाय हूप्स के। ऐसा करने से आपका चेहरा भारी नहीं लगेगा। आप मल्टी कलर जेमस्टोन वाले लॉन्ग इयररिंग्स भी चुन सक ती हैं।
2. अगर चेहरा लंबा है तो उस पर (हूप्स) बडी बाली टाइप सूट करेगी या बडी इयररिंग्स भी पहन सकती हैं। इसमें कंटेंपरेरी सफायर, रूबी या एमरल्ड हूप्स चुन सकती हैं।
3. अगर आपका चेहरा हार्ट शेप्ड है तो आप पर पिरामिड स्टाइल के शैंडेलियर अच्छे लगेंगे जो ठोढी के पास के हिस्से को कवर करके गोलाकार रूप देंगे। बहुत छोटी इयररिंग्स न पहनें।
4. अगर आपका चेहरा चौकोर है तो डैपर स्टड इयररिंग्स, लॉन्ग ड्रॉप इयररिंग्स या इग्जैगरेटेड इयररिंग्स पहनी जा सकती हैं। गोलाकार डायमंड स्ट्डस या प्रिंसेस कट वाली सफायर, रूबी या एमरल्ड इयररिंग्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
5. डायमंड शेप्ड चेहरे वाली युवतियों क ो छोटी और मध्यम आकार वाली इयररिंग्स पहननी चाहिए। स्मॉल ड्रॉप इयररिंग्स ऐसे चेहरे पर सूट करते हैं। छोटी ओवल रिंग्स या मीडियम स्टड भी इस चेहरे पर अच्छे लगते हैं।
6. अंडाकार चेहरा आदर्श चेहरा होता है। जिस पर तमाम अलग-अलग तरह के इयररिंग्स पहने जा सकते हैं। ऐसे चेहरे पर स्टरलिंग सिल्वर इयररिंग्स बहुत अच्छे लगते हैं। लेकिन अधिक लंबे इयररिंग्स न पहनें तो बेहतर होगा। चौडे और बडे चेहरे पर स्लीक यानी पतले इयररिंग्स और खूबसूरत हूप्स अच्छे लगते हैं। फ्लैट या कैस्केडिंग इयररिंग्स भी पहने जा सकते हैं।
7. इसी प्रकार बालों की लंबाई पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। अगर बाल छोटे हैं तो लंबे डैंगल्स और शैंडेलियर इयररिंग्स आसानी से पहन सकती हैं। लेकिन आप ड्रेमेटिक इयररिंग्स नहीं पहन सकती हैं। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर आपको दूसरे गहने भी पहनने है तो आईकैचिंग इयररिंग्स या बोल्ड इयररिंग्स से बचें।
8. आजकल फोकस ज्यूलरी पसंद की जा रही है और इसका मतलब है कि कोई एक आभूषण बोल्ड है ताकि उस पर सबका ध्यान जाए। जैसे अगर इयररिंग्स बोल्ड हैं तो गले में चेन नहीं हो या लाइट हो।
9. अगर आपके बाल लंबे हैं तो आपके पास ज्यूलरी चुनने के लिए बहुत कम विकल्प होते हैं। ऐसे बालों पर छोटे या बटन इयररिंग्स अच्छे लगते हैं, लेकिन आप अगर डैंगल इयररिंग्स पहनना चाहती हैं तो पोनीटेल बनाकर पहन सकती हैं। अन्यथा साधारण बडे बडे स्टोन क ी या लूप इयररिंग्स ऐसे बालों पर फबती है।
10. गेहुएं रंगत वाली युवतियों को ब्राइट और कलरफुल इयररिंग्स पहननी चाहिए। सिल्वरी व्हाइट जैसे पर्ल की इयररिंग्स इस रंगत पर जंचती हैं।
11. गोरी रंगत वाली युवतियों पर लाल रंग की या रेडस्टोन वाली इयररिंग्स या गहरे रंगों जैसे- ब्लैक और मैरून भी जंचती है।
12. कलरफुल या पैटर्न आउटफिट्स के साथ सिंपल हलकी इयररिंग्स पहनें।
अभिनेत्रियों की पसंदीदा ज्यूलरी
एक्सेसरीज के मामले में अभिनेत्रियां बेहद चूजी होती हैं। यहां कुछ अभिनेत्रियां सखी को बता रही हैं अपनी पसंदीदा एक्सेसरीज के बारे में।
कैटरीना कैफ
कोई भी स्त्री चाहे किसी भी देश की हो ज्यूलरी से लगाव रखती है। मुझे डायमंड ज्यूलरी का बहुत शौक है। डायमंड स्टड के छोटे टॉप्स मुझे पहनने अच्छे लगते हैं। लेकिन हाथों में पहनी जाने वाली ज्यूलरी मुझे खास तौर पर पसंद है। इनके डिजाइन नए और खूबसूरत होने चाहिए। बिपाशा बसु ज्यूलरी में मैं वेस्टर्न कपडों के साथ मेल खाते टॉप्स पहनना पसंद करती हूं। एक पैर में एंकलेट भी पहनी हूं। इसके अलावा लंबे शैडेंलियर इयररिंग्स मुझे बहुत अच्छे लगते हैं।
प्रीति जिंटा
मुझे ड्रेस के साथ मैचिंग पर्स, सैंडल्स और डायमंड के टॉप्स पहनना अच्छा लगता है।
रानी मुखर्जी
मुझे गोल्ड की ज्यूलरी अधिक पसंद है। खासतौर पर हूप्स अच्छे लगते हैं। इसके अलावा विशेष अवसर पर मैं कुंदन का जडाऊ हार जरूर पहनती हूं।