क्लॉस में काफी हंसी खुशी का वातावरण था। सभी काफी गंभीरता के साथ सर का लेक्चर समझने का प्रयास कर रहे थे। परन्तु पता नहीं, ये किसका दोष था- अध्यापक का, छात्र-छात्राओं का, सेलेबस का या पढ़ाने के लिए प्रयोग की जा रही विधियों का, कि न तो पढ़ाने वाले को ये समझ आ रहा था कि वो क्या पढ़ा रहा है और न ही पढ़ने वालों को ही पता लग रहा था कि वे क्या पढ़ रहे है।
लेकिन फिर भी क्लास में हंसी-खुशी का माहौल था। ये शायद उम्र का दोष भी हो सकता है कि इस उम्र में अध्यापक पढ़ाने के लिए रसहीन हो जाते हैं और छात्र..। छात्रों के पढ़ने के मूड से तो सभी वाकिफ है। असल में ये क्लॉस थी बी.टेक. सेकण्ड सैम की। और मैं इस कक्षा की निर्जीव बैंच हूं।
इस क्लास में मैं सभी कुछ ध्यानपूर्वक देखती हूं। आप मुझे एक चश्मदीद गवाह भी कह सकते है। इस कक्षा में घटने वाली हर घटना की साक्षी। वैसे सच कहूं तो मुझे ये क्लास बहुत पसंद है। क्योंकि इस क्लास के सभी बच्चे भले है। एक-दूसरे की सहायता के लिये हमेशा तत्पर रहते है। एकता की भावना का बेहतरीन उदाहरण इस क्लास में आपको मिल जायेगा।
हालांकि पांचों अंगुलियां एक समान नहीं होती। कुछ छोटी-छोटी बातें तो होती ही रहती है पर फिर भी मुझे इस क्लास पर पूरा भरोसा है।
मेरे ऊपर तीन लड़के बैठे हुए थे- राहुल, सुधांशु और संदीप। तीनों ही पढ़ने में बहुत अच्छे है। संदीप इस शहर का नहीं है। वह लखनऊ निवासी है। लखनऊ से संबंधित होने के कारण ही उसकी बोली इतनी मीठी है कि मेरा मन बस उसे ही सुनते रहने को करता है। 'हम कह रहे है ना, आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।' 'ये सर तो क्या पढ़ा जाते है, हम कुछ समझ ही नहीं पाते है।' उसकी ऐसी-ऐसी बातें मेरे भी मन में मिठास घोल देती है। पतला-दुबला सा संदीप यहां अपने बचपन के दोस्त के साथ कमरा किराये पर लेकर रहता है। वह अक्सर बीमार रहता है। परन्तु अन्तर्मुखी होने के कारण किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता। आज भी वह कुछ अस्वस्थ ही लग रहा था।
सर का लेक्चर आगे चल रहा था परन्तु पहली बैंच से आखरी बैंच तक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का विषय भिन्न-भिन्न था। निशा अपना असाइन्मेंट पूरा कर रही थी क्योंकि यदि आज जमा नहीं हुआ तो नम्बर नहीं मिलेंगे। आकाश किसी दूसरे विषय की पढ़ाई में तल्लीन था, उसे सर के लेक्चर में मजा नहीं आ रहा था। पूजा अक्सर फोन पर व्यस्त रहती है और आज भी क्लास में वो वही कर रही थी। बहुत हिम्मत वाली लड़की है पूजा। उसे किसी से डर नहीं लगता। अजय एस एम एस का बहुत शौकीन है। इसलिए वो एस एम एस ही कर रहा था। कोई क्लास में ऐसा भी था जो सो रहा था। रीना को भी बहुत तेज नींद आ रही थी। पूरी क्लास इसी प्रकार की पढ़ाई में गंभीरता से व्यस्त थी।
पर फिर भी क्लास में पढ़ाई चल रही थी। संदीप को भी अब तो शायद नींद आने ही लगी। वह धीरे-धीरे अपना सिर मुझ पर रखने लगा और अन्तत: मुझ पर लेट ही गया। लेकिन ये तो.. अरे! ये क्या! ये तो अचानक बराबर में बैठे सुधांशु पर गिर गया। '- क्या हुआ संदीप? तुम ठीक तो हो?'
'सर! संदीप बेहोश हो गया।'
पूरी क्लास में हड़कंप मच गया। यह अचानक संदीप को क्या हुआ? मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा था। बस चारों ओर छात्र-छात्राओं की भीड़ दिखाई दे रही थी जो केवल संदीप को देखती हुई 'क्या हुआ? क्या हुआ?' का राग अलाप रही थी। तभी सर आ गये..
'क्या हुआ? कौन है ये लड़का? इसी क्लास का ही है क्या? कैसे बेहोश हो गया?'
दूर खड़े होकर सर ने प्रश्नों की बौछार तो खूब की परन्तु उसको (संदीप को) भली-भांति लेटाने के लिए एक कदम न बढ़ा सके। मैं समझ नहीं पा रही थी कि ये इस कक्षा के जिम्मेदार अध्यापक हैं या कोई तमाशबीन?
यह अध्यापक की ही जिम्मेदारी होती है कि यदि किसी विद्यार्थी को किसी प्रकार की कोई भी परेशानी हो तो उसे 'प्राथमिक चिकित्सा' उपलब्ध करायी जाये।
पर ये तो एक मूकदर्शक की भांति खड़े हो गये थे। - 'सर! डायरेक्टर सर को फोन कर दीजिए। संदीप को हॉस्पिटल ले जाना चाहिए।' सुधांशु ने कहा। - 'ठीक कहते हो तुम। यही करना चाहिए। अभी करता हूं। पर पहले देखना जरा इसकी जेब में कोई फोन है क्या? वो क्या है न मेरे फोन में बैलेंस नहीं है और कॉल रेट भी मंहगी है।'
(छी! कितनी ओछी बात कर रहे थे वे सर। शर्म आती है यो सोचकर भी कि आज के हमारे कुछ अध्यापक कितने गैर जिम्मेदार है।)
'- हां सर, फोन तो है। ये लीजिए!' राहुल ने संदीप का फोन सर को दे दिया।
(नम्बर मिलाने के बाद...)
- 'हां सर, मैं बोल रहा हूं। जी हां, जी हां। हां सर, सब ठीक है। आपकी कृपा है। और घर में सब ठीक है ना, भाभी जी, बच्चे? क्या कर रहे है आजकल? ओहो, बहुत बड़े हो गये है। हां जी। वो आज आपकी बहुत याद आ रही थी तो सोचा बात ही कर लूं। जी सब आपकी मेहरबानी है। जी सर, एक छोटी सी दिक्कत है। नहीं-नहीं ज्यादा घबराने वाली बात नहीं है। मेरी क्लास में एक लड़का बेहोश पड़ा है। हां, पता नहीं क्या हुआ। आप तो जानते ही है इन लड़कों को। किया होगा कुछ नशा वगैरह। हां-हां ज्यादा परेशान न होएं, मैं देख लेता हूं। आप आराम से आ जाइये। ओके साहब नमस्कार!' (मैं यह सोच रही थी कि क्या भाभी जी व बच्चे उस बेहोश पड़े इंसान से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गये है। मरते हुए व्यक्ति के लिए इनके मन में कोई संवेदना नहीं है। और जिस विद्यार्थी की पहचान तक वे नहीं कर पा रहे थे, उस पर नशा करने का आरोप लगा रहे है!)
तभी एक अन्य सर प्रवेश करते है।
- 'क्या बात है सर जी, आज क्लास नहीं छोड़नी है क्या? अजी बहुत तेज भूख लगी है। अब चलिए भी। और ये क्या इन छात्रों के बीच ऐसे क्यों घिरे खड़े है। क्या हुआ?'
- 'कुछ नहीं जनाब, ये लड़का बेहोश हो गया है। अरे भई कुछ करो आप लोग (छात्रों को कहते हुए)। इसके रिश्तेदारों को बुलाओ।' और ये कहते हुए वे दोनों क्लास से बाहर चले गये।
पर ये क्या! इस क्लास के बच्चे भी अपने-अपने काम में व्यस्त हो गये। एक झलक देखिए-
निशा: अरे चल सुनीता, अच्छा मौका है जल्दी से असाइन्मेंट पूरा कर लेते है। थैंक्यू संदीप! बस थोड़ी देर और बेहोश रहना। जल्दी चल सुनीता, तुझे भी तो अपना काम पूरा करना है।
पूजा: (फोन पर) हाय मोहित। कैसे हो? नहीं क्लास नहीं हो रही है। वो संदीप बेहोश हो गया। मैंने सोचा जब तक वो बेहोश है तब तक तुमसे ही बात कर लूं। कहां हो अभी..
आकाश, (अजय से)- यार मैं तो घर जा रहा हूं। वैसे भी कोई पढ़ाई नहीं हो रही। और मुझे तो अब बहुत तेज नींद आ रही है।
(हे भगवान! मेरा इस क्लास के लिए जो भ्रम था वो टूट गया। क्या वाकई ये वो ही क्लास है जो मैंने अब तक देखा था वो हंसते-गाते खुशी के पल थे। पर आज जब मुसीबत में कोई है तो एक-एक व्यक्ति का असली रूप दिखाई पड़ रहा है।)
शायद वो सब मेरी गलतफहमी थी। और सच यही था। आज का इंसान वाकई इतना पत्थर दिल, इतना स्वार्थी हो गया है? लोगों के दिलों से प्रेम, दया, सौहार्द के भाव समाप्त हो गये है! एक दूसरे से मिलने पर किया गया व्यवहार मात्र दिखावा है। लोग दो-दो चेहरे लेकर जीने लगे है। निजत्व की भावना ने परोपकार जैसे खब्दों को अर्थहीन कर दिया। सोचना होगा!!!
आज ये सब देखकर मुझे ऐसा लग रहा है मानो मैं कोई सुनहरा सपना टूटने के कारण अचानक जग गई हूं। वो सपना जिसमें मैं अपने आस-पास अच्छे लोगों को देख रही थी, जिसमें मैंने खुशियां देखी, जिसमें मैंने लोगों के बीच उमड़ते प्रेम को देखा, जिसमें मैंने एक-दूसरे के लिए प्राण न्यौछावर करते देखा। पर जब सपना टूटा तो वास्तविकता जानकर बहुत दुख हुआ। कुछ भी वैसा नहीं रहा अब हमारे समाज में। यहां सिर्फ लोग अपना स्वार्थ साधने पर आमादा है। लोग सिर्फ अपने लिए जीने लगे है। दूसरों का दुख-दर्द उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। दूसरों के जलते झोपड़े पर अपनी रोटी सेंकने का हुनर आज के इंसान ने बखूबी सीख लिया है।
पर इस प्रकार का जीवन हमें किस दिशा में ले जा रहा है? क्या ये विनाश की ओर बढ़ते कदम नहीं है? क्या मरती संवेदनशीलता व मरती इंसानियत मरते समाज की पहली सीढ़ी नहीं है? क्या ऐसी भावनाएं हमें इंसान कहने का हक प्रदान करती है।
संदीप आधे घंटे बेहोश पड़ा रहा। इस आधं घंटे में सभी ने अपने-अपने जरूरी कार्य समाप्त कर लिए। पर किसी ने भी संदीप की सुध न ली...
सुमीर तोमर की कलम से
मंगलवार, 8 दिसंबर 2009
चेहरे के अनुरूप चुने ज्वेलरी
अगर आपका चेहरा गोलाकार है तो आपको लांग ड्रॉप इयररिंग्स पहने चाहिए, बजाय हूप्स के। ऐसा करने से आपका चेहरा भारी नहीं लगेगा। आप मल्टी कलर जेमस्टोन वाले लॉन्ग इयररिंग्स भी चुन सक ती हैं।
2. अगर चेहरा लंबा है तो उस पर (हूप्स) बडी बाली टाइप सूट करेगी या बडी इयररिंग्स भी पहन सकती हैं। इसमें कंटेंपरेरी सफायर, रूबी या एमरल्ड हूप्स चुन सकती हैं।
3. अगर आपका चेहरा हार्ट शेप्ड है तो आप पर पिरामिड स्टाइल के शैंडेलियर अच्छे लगेंगे जो ठोढी के पास के हिस्से को कवर करके गोलाकार रूप देंगे। बहुत छोटी इयररिंग्स न पहनें।
4. अगर आपका चेहरा चौकोर है तो डैपर स्टड इयररिंग्स, लॉन्ग ड्रॉप इयररिंग्स या इग्जैगरेटेड इयररिंग्स पहनी जा सकती हैं। गोलाकार डायमंड स्ट्डस या प्रिंसेस कट वाली सफायर, रूबी या एमरल्ड इयररिंग्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
5. डायमंड शेप्ड चेहरे वाली युवतियों क ो छोटी और मध्यम आकार वाली इयररिंग्स पहननी चाहिए। स्मॉल ड्रॉप इयररिंग्स ऐसे चेहरे पर सूट करते हैं। छोटी ओवल रिंग्स या मीडियम स्टड भी इस चेहरे पर अच्छे लगते हैं।
6. अंडाकार चेहरा आदर्श चेहरा होता है। जिस पर तमाम अलग-अलग तरह के इयररिंग्स पहने जा सकते हैं। ऐसे चेहरे पर स्टरलिंग सिल्वर इयररिंग्स बहुत अच्छे लगते हैं। लेकिन अधिक लंबे इयररिंग्स न पहनें तो बेहतर होगा। चौडे और बडे चेहरे पर स्लीक यानी पतले इयररिंग्स और खूबसूरत हूप्स अच्छे लगते हैं। फ्लैट या कैस्केडिंग इयररिंग्स भी पहने जा सकते हैं।
7. इसी प्रकार बालों की लंबाई पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। अगर बाल छोटे हैं तो लंबे डैंगल्स और शैंडेलियर इयररिंग्स आसानी से पहन सकती हैं। लेकिन आप ड्रेमेटिक इयररिंग्स नहीं पहन सकती हैं। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर आपको दूसरे गहने भी पहनने है तो आईकैचिंग इयररिंग्स या बोल्ड इयररिंग्स से बचें।
8. आजकल फोकस ज्यूलरी पसंद की जा रही है और इसका मतलब है कि कोई एक आभूषण बोल्ड है ताकि उस पर सबका ध्यान जाए। जैसे अगर इयररिंग्स बोल्ड हैं तो गले में चेन नहीं हो या लाइट हो।
9. अगर आपके बाल लंबे हैं तो आपके पास ज्यूलरी चुनने के लिए बहुत कम विकल्प होते हैं। ऐसे बालों पर छोटे या बटन इयररिंग्स अच्छे लगते हैं, लेकिन आप अगर डैंगल इयररिंग्स पहनना चाहती हैं तो पोनीटेल बनाकर पहन सकती हैं। अन्यथा साधारण बडे बडे स्टोन क ी या लूप इयररिंग्स ऐसे बालों पर फबती है।
10. गेहुएं रंगत वाली युवतियों को ब्राइट और कलरफुल इयररिंग्स पहननी चाहिए। सिल्वरी व्हाइट जैसे पर्ल की इयररिंग्स इस रंगत पर जंचती हैं।
11. गोरी रंगत वाली युवतियों पर लाल रंग की या रेडस्टोन वाली इयररिंग्स या गहरे रंगों जैसे- ब्लैक और मैरून भी जंचती है।
12. कलरफुल या पैटर्न आउटफिट्स के साथ सिंपल हलकी इयररिंग्स पहनें।
अभिनेत्रियों की पसंदीदा ज्यूलरी
एक्सेसरीज के मामले में अभिनेत्रियां बेहद चूजी होती हैं। यहां कुछ अभिनेत्रियां सखी को बता रही हैं अपनी पसंदीदा एक्सेसरीज के बारे में।
कैटरीना कैफ
कोई भी स्त्री चाहे किसी भी देश की हो ज्यूलरी से लगाव रखती है। मुझे डायमंड ज्यूलरी का बहुत शौक है। डायमंड स्टड के छोटे टॉप्स मुझे पहनने अच्छे लगते हैं। लेकिन हाथों में पहनी जाने वाली ज्यूलरी मुझे खास तौर पर पसंद है। इनके डिजाइन नए और खूबसूरत होने चाहिए। बिपाशा बसु ज्यूलरी में मैं वेस्टर्न कपडों के साथ मेल खाते टॉप्स पहनना पसंद करती हूं। एक पैर में एंकलेट भी पहनी हूं। इसके अलावा लंबे शैडेंलियर इयररिंग्स मुझे बहुत अच्छे लगते हैं।
प्रीति जिंटा
मुझे ड्रेस के साथ मैचिंग पर्स, सैंडल्स और डायमंड के टॉप्स पहनना अच्छा लगता है।
रानी मुखर्जी
मुझे गोल्ड की ज्यूलरी अधिक पसंद है। खासतौर पर हूप्स अच्छे लगते हैं। इसके अलावा विशेष अवसर पर मैं कुंदन का जडाऊ हार जरूर पहनती हूं।
2. अगर चेहरा लंबा है तो उस पर (हूप्स) बडी बाली टाइप सूट करेगी या बडी इयररिंग्स भी पहन सकती हैं। इसमें कंटेंपरेरी सफायर, रूबी या एमरल्ड हूप्स चुन सकती हैं।
3. अगर आपका चेहरा हार्ट शेप्ड है तो आप पर पिरामिड स्टाइल के शैंडेलियर अच्छे लगेंगे जो ठोढी के पास के हिस्से को कवर करके गोलाकार रूप देंगे। बहुत छोटी इयररिंग्स न पहनें।
4. अगर आपका चेहरा चौकोर है तो डैपर स्टड इयररिंग्स, लॉन्ग ड्रॉप इयररिंग्स या इग्जैगरेटेड इयररिंग्स पहनी जा सकती हैं। गोलाकार डायमंड स्ट्डस या प्रिंसेस कट वाली सफायर, रूबी या एमरल्ड इयररिंग्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
5. डायमंड शेप्ड चेहरे वाली युवतियों क ो छोटी और मध्यम आकार वाली इयररिंग्स पहननी चाहिए। स्मॉल ड्रॉप इयररिंग्स ऐसे चेहरे पर सूट करते हैं। छोटी ओवल रिंग्स या मीडियम स्टड भी इस चेहरे पर अच्छे लगते हैं।
6. अंडाकार चेहरा आदर्श चेहरा होता है। जिस पर तमाम अलग-अलग तरह के इयररिंग्स पहने जा सकते हैं। ऐसे चेहरे पर स्टरलिंग सिल्वर इयररिंग्स बहुत अच्छे लगते हैं। लेकिन अधिक लंबे इयररिंग्स न पहनें तो बेहतर होगा। चौडे और बडे चेहरे पर स्लीक यानी पतले इयररिंग्स और खूबसूरत हूप्स अच्छे लगते हैं। फ्लैट या कैस्केडिंग इयररिंग्स भी पहने जा सकते हैं।
7. इसी प्रकार बालों की लंबाई पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। अगर बाल छोटे हैं तो लंबे डैंगल्स और शैंडेलियर इयररिंग्स आसानी से पहन सकती हैं। लेकिन आप ड्रेमेटिक इयररिंग्स नहीं पहन सकती हैं। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर आपको दूसरे गहने भी पहनने है तो आईकैचिंग इयररिंग्स या बोल्ड इयररिंग्स से बचें।
8. आजकल फोकस ज्यूलरी पसंद की जा रही है और इसका मतलब है कि कोई एक आभूषण बोल्ड है ताकि उस पर सबका ध्यान जाए। जैसे अगर इयररिंग्स बोल्ड हैं तो गले में चेन नहीं हो या लाइट हो।
9. अगर आपके बाल लंबे हैं तो आपके पास ज्यूलरी चुनने के लिए बहुत कम विकल्प होते हैं। ऐसे बालों पर छोटे या बटन इयररिंग्स अच्छे लगते हैं, लेकिन आप अगर डैंगल इयररिंग्स पहनना चाहती हैं तो पोनीटेल बनाकर पहन सकती हैं। अन्यथा साधारण बडे बडे स्टोन क ी या लूप इयररिंग्स ऐसे बालों पर फबती है।
10. गेहुएं रंगत वाली युवतियों को ब्राइट और कलरफुल इयररिंग्स पहननी चाहिए। सिल्वरी व्हाइट जैसे पर्ल की इयररिंग्स इस रंगत पर जंचती हैं।
11. गोरी रंगत वाली युवतियों पर लाल रंग की या रेडस्टोन वाली इयररिंग्स या गहरे रंगों जैसे- ब्लैक और मैरून भी जंचती है।
12. कलरफुल या पैटर्न आउटफिट्स के साथ सिंपल हलकी इयररिंग्स पहनें।
अभिनेत्रियों की पसंदीदा ज्यूलरी
एक्सेसरीज के मामले में अभिनेत्रियां बेहद चूजी होती हैं। यहां कुछ अभिनेत्रियां सखी को बता रही हैं अपनी पसंदीदा एक्सेसरीज के बारे में।
कैटरीना कैफ
कोई भी स्त्री चाहे किसी भी देश की हो ज्यूलरी से लगाव रखती है। मुझे डायमंड ज्यूलरी का बहुत शौक है। डायमंड स्टड के छोटे टॉप्स मुझे पहनने अच्छे लगते हैं। लेकिन हाथों में पहनी जाने वाली ज्यूलरी मुझे खास तौर पर पसंद है। इनके डिजाइन नए और खूबसूरत होने चाहिए। बिपाशा बसु ज्यूलरी में मैं वेस्टर्न कपडों के साथ मेल खाते टॉप्स पहनना पसंद करती हूं। एक पैर में एंकलेट भी पहनी हूं। इसके अलावा लंबे शैडेंलियर इयररिंग्स मुझे बहुत अच्छे लगते हैं।
प्रीति जिंटा
मुझे ड्रेस के साथ मैचिंग पर्स, सैंडल्स और डायमंड के टॉप्स पहनना अच्छा लगता है।
रानी मुखर्जी
मुझे गोल्ड की ज्यूलरी अधिक पसंद है। खासतौर पर हूप्स अच्छे लगते हैं। इसके अलावा विशेष अवसर पर मैं कुंदन का जडाऊ हार जरूर पहनती हूं।
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