शनिवार, 28 नवंबर 2009

बीमा में कैरियर की जानकारी

मेट्रो के बाद ग्रामीण इलाकों की तरफ इंश्योरेंस के बढते कदम से इस क्षेत्र में करियर के नए रास्ते खुलने लगे हैं- ऐसा मानते हैं मैक्स न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट राजन कालिया। वे तर्क देते हुए कहते हैं कि भारत की आधी से अधिक आबादी अभी भी 20-60 आयु वर्ग के दायरे में आते हैं। यही वजह है कि इंश्योरेंस सेक्टर की रफ्तार इस दौर में भी कायम है। अब स्थिति यह है कि इस प्रोफेशन से हाई प्रोफाइल लोग भी जुडने लगे हैं। हाई प्रोफाइल लोगों की सूची में लालू प्रसाद यादव की बेटी का नाम भी शामिल है, जो एलआईसी एजेंट हैं।
योग्यता
12वीं के बाद इंश्योरेंस के क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है। इसके बाद आप बीए (इंश्योरेंस) में एडमिशन ले सकते हैं या फिर एजेंट के रूप में करियर की शुरुआत कर सकते हैं। यदि आपने साइंस सब्जेक्ट से 12वीं पास किया है, तो बीएससी एक्चुरिअॅल साइंस में एंट्री ले सकते हैं।
कोर्सेज
इंश्योरेंस में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट से लेकर डिग्री और मास्टर डिग्री कोर्स तक उपलब्ध हैं। कोर्स की अवधि अलग-अलग है। कुछ कॉलेज बीए (इंश्योरेंस) कोर्स ऑफर कर रहे हैं, जिसकी अवधि तीन वर्ष है। वैसे, सर्टिफाइड रिस्क ऐंड इंश्योरेंस मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा भी कर सकते हैं। इस कोर्स की अवधि अमूमन तीन साल की होती है। यदि इंश्योरेंस ऐंड रिस्क मैनेजमेंट में डिप्लोमा करना चाहते हैं, तो इसकी अवधि एक वर्ष की है। वैसे, डिस्टेंस लर्निग के माध्यम से भी इंश्योरेंस से जुडे कोर्स कर सकते हैं। एजेंट बनने के लिए इंश्योरेंस एजेंट का कोर्स भी किया जा सकता है, इसकी अवधि 100-150 घंटे की होती है।
करियर प्लानिंग
यदि कम्युनिकेशन स्किल अच्छी है, तो इंश्योरेंस सेक्टर में खूब स्कोप हैं। यहां आप असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, इंश्योरेंस सर्वेयर, रिस्क मैनेजर, अंडररायटर, एक्चुरिज, इंश्योरेंस कंसल्टेंट, एजेंट आदि के रूप में करियर बना सकते हैं।
सेफ जोन
इंश्योरेंस सेक्टर को करियर के लिहाज से सेफ जोन माना जा सकता है, क्योंकि कुछ कंपनियां इन दिनों बडी संख्या में लोगों की बहाली कर रही हैं। लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल एस.बी.माथुर कहते हैं, नई-नई कंपनियों के इंश्योरेंस के क्षेत्र में कदम रखने की वजह से इस फील्ड में करियर की भरपूर संभावनाएं दिख रही हैं। खासकर इन दिनों एक्चुरिज और ट्रेजरी मैनेजमेंट के क्षेत्र से जुडे पेशेवर लोगों की मार्केट में अधिक डिमांड है, क्योंकि इनकी मांग दूसरे क्षेत्रों में भी खूब है। इसके अलावा, मार्केटिंग और सेल्स में भी लोगों की अधिक मांग है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, एलआईसी अपनी कामकाजी क्षमता को बढाने के लिए मार्च, 2011 तक 11 लाख एजेंटों की भर्ती करेगा। रिलायंस लाइफ 90 हजार एजेंट और 2500 मैनेजरों को भर्ती करने की प्रक्रिया में है। आने वाले दिनों में बीमा कंपनियों में तीन लाख फाइनेंशियल प्लानिंग एडवाइजर और तीस हजार मैनेजर की भर्तियां भी हो सकती हैं।
सैलॅरी पैकेज
इंश्योरेंस सेक्टर में शुरुआती सैलॅरी आठ से 10 हजार रुपये हो सकती है। सेल्स मैनेजर के रूप में काम करने वालों की सैलॅरी 20-25 हजार रुपये के बीच होती है। इसके अलावा, कई तरह के अलाउंस भी मिलते हैं। अनुभव हासिल करने के बाद प्रति माह 30 से 35 हजार रुपये आसानी से कमा सकते हैं। वैसे, सक्रिय एजेंट महीने में 12-15 हजार रुपये आसानी से कमा लेते हैं।
इंस्टीटयूट वाच
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर (एमबीए इंश्योरेंस)
www.nlujodhpur.ac.in
एमिटी स्कूल ऑफ इंश्योरेंस ऐंड एक्चुरिअॅल साइंस, नई दिल्ली (पीजी डिप्लोमा इन इंश्योरेंस मैनेजमेंट आदि)
www.amity.edu
आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी, हैदराबाद (एमबीए इंश्योरेंस)
www.icfai.org
द इंस्टीटयूट ऑफ इंश्योरेंस ऐंड रिस्क मैनेजमेंट (पीजी डिप्लोमा कोर्स इन इंश्योरेंस, जनरल इंश्योरेंस ऐंड रिस्क मैनेजमेंट)
www.iirmworld.in
भारतीय विद्या भवन केंद्र
(पीजी डिप्लोमा कोर्स इन इंश्योरेंस ऐंड रिस्क मैनेजमेंट, पार्ट-टाइम)
www.bhavanis. info/rp imc
इंस्टीटयूट ऑफ सर्टिफाइड रिस्क ऐंड इंश्योरेंस मैनेजर्स (रिस्क ऐंड इंश्योरेंस मैनेजमेंट प्रोग्राम)
www.icrimindia.org
यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली, नई दिल्ली
http://www.du.ac.in
सिंबायोसिस सेंटर ऑफ डिस्टेंस लर्निग, पुणे
www.scdl.net
कंपनियों ने मिलाया संस्थानों से हाथ
इंश्योरेंस के क्षेत्र में पेशेवर लोगों की कमी को देखते हुए कुछ कंपनियां शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता कर रही हैं। निजी इंश्योरेंस कंपनी मैक्स न्यूयार्क लाइफ ने सिम्बायोसिस इंस्टीटयूट ऑफ डिस्टेंस लर्निग के साथ समझौता किया है। इसके अलावा, कंपनी ने पीजी डिप्लोमा कोर्स के लिए मुम्बई के स्कूल ऑफ कॉमर्स ऑफ एनएमआईएमएस यूनिवर्सिटी और पंजाब कॉलेज ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के साथ गठजोड किया है। एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ ने भी कुछ इसी तरह के कोर्स के लिए मनीपाल अकादमी के साथ हाथ मिलाया है। पिछले साल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने 10 महीने के एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम के लिए आईआईएम कोलकाता से समझौता किया है, जबकि मेटलाइफ ने भी कुशल पेशेवरों को तैयार करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय से हाथ मिलाया है। शैक्षणिक संस्थानों ने कंपनियों के साथ मिलकर पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के कोर्स शुरू किए हैं। इन कोर्सो की अवधि तीन महीने से लेकर एक साल तक की है।
क्या कहती है रिपोर्ट
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन की अध्यक्षता में बीमा क्षेत्र पर गठित समिति ने कहा है कि घरेलू बीमा कंपनी को पेशेवर लोगों की कमी का सामना करना पड रहा है। बीमा कंपनियों में सबसे ज्यादा कमी एक्चुरिअॅल और ट्रेजरी मैनेजमेंट पेशेवरों की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बीमा क्षेत्र में टैलेंटेड लोगों की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत है।

पंकज उपाध्याय
भारतीय एकता संगठन

पढ़े कानून की पढ़ाई लड़े इंसाफ की लड़ाई

कानून का नाम लेते ही हमारे सामने अदालत, न्यायाधीश, एडवोकेट आदि की छवि उभर आती है। अपने देश के संदर्भ में बात करें, तो तहसील और डिस्ट्रिक्ट लेवॅल से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में भारी संख्या में मुकदमों की लाइन लगी रहती है। जाहिर है कि इन सब मामलों को निपटाने के लिए बडी संख्या में वकीलों की जरूरत होती है। इतना ही नहीं, दैनिक जीवन में भी हममें से तमाम लोगों को कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड जाता है, जब कानूनी सलाह की जरूरत महसूस होती है। ऐसी सलाह कानूनी मामलों के जानकार ही दे पाते हैं।
कॉर्पोरेट सेक्टर ने खोली नई राहें
भारतीय अर्थव्यवस्था की लगातार मजबूती और कॉर्पोरेट सेक्टर द्वारा देश और दुनिया में अपनी नई पहचान बनाने से लॉ प्रोफेशन के लिए भी नए और आकर्षक रास्ते खुल गए हैं। बडी देसी, विदेशी और मल्टीनेशनल कंपनियां अपने विस्तार के साथ-साथ अपने मामलों की देख-रेख के लिए अब बाकायदा लीगल एक्सप‌र्ट्स को भी नौकरी पर रखने लगी हैं। भारतीय व भारतीय मूल के बिजनेस हाउसों, जैसे-मित्तल स्टील, टाटा, रिलायंस, इंफोसिस, विप्रो, बिडला, बजाज, गोदरेज जैसी तमाम देसी और मल्टीनेशनल कंपनियां तेजी से आगे बढ रही हैं। मर्जर, डी-मर्जर, अधिग्रहण, डिस्प्यूट्स आदि की बढती गतिविधियों के चलते इन कंपनियों का काम अब लीगल एडवाइजर या वकील हायर करने से ही नहीं चल रहा (जैसा कि पहले होता था), बल्कि अब ये कंपनियां अट्रैक्टिव पैकेज पर प्रतिभाशाली लॉ ग्रेजुएट्स को नियुक्त करने लगी हैं। पूरे देश में रिअॅल इस्टेट में चल रहे बूम के कारण डेवलॅपर्स और बिल्डर्स को भी वकीलों और भूमि से जुडे कानूनी मामलों के जानकारों की बडी संख्या में जरूरत महसूस हो रही है। आज मल्टीनेशनल कंपनियां अपने लीगल एक्सप‌र्ट्स को तमाम सुविधाओं के साथ 1 से 10 लाख रुपये मासिक तक सैलॅरी दे रही हैं, जबकि मध्यम दर्जे की और छोटी कंपनियां कानूनी मामलों के जानकारों और वकीलों को प्रतिमाह 40-50 हजार से लेकर 2 लाख रुपये तक वेतन दे रही हैं। इस तरह के आकर्षक पैकेज को देखते हुए अब तमाम लॉ ग्रेजुएट कचहरी में प्रैक्टिस करने का रास्ता छोडकर कॉर्पोरेट कंपनियों का रुख करने लगे हैं।
कैसे करें एंट्री
कानूनी मामलों की जानकारी रखने और लीगल प्रोफेशन में एंट्री के लिए हमारे यहां सबसे बुनियादी पढाई बैचलर ऑफ लॉ यानी एलएलबी की है। इस कोर्स के तहत सिविल लॉ, क्रिमिनल लॉ, कॉर्पोरेट लॉ, प्रॉपर्टी लॉ, इनकम टैक्स लॉ, इंटरनेशनल लॉ, फैमिली लॉ, लेबर लॉ, प्रेस लॉ, एक्साइज लॉ, कॉन्स्टीटयूशनल लॉ, एडमिनिस्ट्रेशन लॉ, सेल ऑफ गुड्स लॉ, ट्रेड मार्क, कॉपीराइट, पेटेंट लॉ आदि के बारे में पढाया जाता है। लॉ के इन विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर इनमें भी करियर बनाया जा सकता है।
लॉ में हायर स्टडी
एलएलबी : लॉ में उच्च शिक्षा की शुरुआत एलएलबी से होती है। इसमें दो तरह के कोर्स हैं। तीन वर्षीय लॉ कोर्स में किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएशन (तीन वर्ष) के बाद एडमिशन लिया जा सकता है। जबकि पांच वर्षीय लॉ कोर्स में बारहवीं (किसी भी स्ट्रीम में) के बाद दाखिला दिया जाता है। इन दिनों देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों/ कॉलेजों के लॉ डिपार्टमेंट/सेंटर में पांच वर्षीय लॉ कोर्स संचालित है। खास बात यह है कि इससे एक वर्ष की बचत हो जाती है, क्योंकि तीन वर्ष ग्रेजुएशन करने के बाद एलएलबी करने में तीन वर्ष और (यानी कुल छह वर्ष) लग जाते हैं।
एलएलएम : एलएलबी करने के बाद इस क्षेत्र में आगे की पढाई के इच्छुक युवा पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स कर सकते हैं। इस कोर्स का नाम है-मास्टर ऑफ लॉ यानी एलएलएम। दो वर्ष की अवधि वाले इस मास्टर कोर्स में केवल एलएलबी उत्तीर्ण युवा ही प्रवेश ले सकते हैं।
पीएचडी/एलएलडी : लॉ में टीचिंग प्रोफेशन में जाने या इसके समकक्ष बेहतर करियर चुनने के लिए रिसर्च ज्वॉइन किया जा सकता है, जिसे डॉक्टर ऑफ लॉ यानी एलएलडी (पीएचडी) के नाम से जाना जाता है। इसमें अच्छे अंकों से एलएलएम उत्तीर्ण चुनिंदा युवाओं को प्रवेश दिया जाता है।
कैसे मिलता है एडमिशन
एलएलबी और एलएलएम कोर्सो में प्रवेश आमतौर पर एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से होता है। इसके लिए कोई एक विश्वविद्यालय या कई विश्वविद्यालय मिलकर प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं। प्रवेश परीक्षा में छात्रों को मिले अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाई जाती है और सीटों की संख्या के अनुपात में प्रवेश दिया जाता है।
कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट)
कुछ वर्ष पहले तक तीन वर्षीय लॉ यानी विधि की पढाई के लिए किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएशन (तीन वर्षीय) करना होता था, लेकिन इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स की शुरुआत हो जाने से अब बारहवीं के बाद सीधे लॉ में एडमिशन लिया जा सकता है। पहले जहां अलग-अलग बीए (3 वर्ष) और एलएलबी (3 वर्ष) करने में कुल 6 वर्ष लग जाते थे, वहीं अब एकीकृत बीए या बीएससी-एलएलबी कोर्स में एक वर्ष की बचत हो जाती है, क्योंकि इस कोर्स की अवधि महज 5 वर्ष है। अगर आप इस तरह का कोर्स किसी प्रतिष्ठित लॉ यूनिवर्सिटी या कॉलेज से करते हैं, तो कोर्स करने के तुरंत बाद आपको कॉर्पोरेट कंपनियों से आकर्षक पैकेज पर जॉब ऑफर मिल सकता है। खास बात यह है कि क्लैट यानी कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट के माध्यम से आपको देश के मशहूर लॉ विश्वविद्यालयों में से किसी एक से कोर्स करने का सुअवसर प्राप्त होता है।
क्या है क्लैट?
अभी तक नेशनल लॉ स्कूलों और अन्य विश्वविद्यालयों के लॉ सेंटरों में पहले अलग-अलग आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से एडमिशन होते थे, लेकिन इस वर्ष से देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों के सात नेशनल लॉ स्कूलों (एनएलएसआईयू, नलसार, एनएलआईयू, एनयूजेएस, एनएलयू, एचएनएलयू तथा जीएनएलयू) ने अपने बीए-एलएलबी के पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स में प्रवेश के लिए एक संयुक्त प्रवेश परीक्षा शुरू करने का निर्णय लिया है। इसी का नाम क्लैट यानी कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट है। वर्ष 2008-09 सत्र में प्रवेश के लिए पहला क्लैट आगामी 11 मई, 2008 को होने जा रहा है। इस वर्ष यह टेस्ट सबसे पुराने नेशनल लॉ स्कूल एनएलएसआईयू, बंगलुरु के संयोजन में हो रहा है। इस परीक्षा में किसी भी स्ट्रीम में अंग्रेजी विषय सहित बारहवीं उत्तीर्ण युवा हिस्सा ले सकते हैं।
कैसे होंगे क्लैट में प्रश्न?
कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट यानी क्लैट में ऑब्जेक्टिव टाइप के प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें मुख्यतया पांच क्षेत्रों (इंग्लिश, जनरल नॉलेज, मैथमेटिक्स, लीगल एप्टीट्यूड तथा लॉजिकल रीजनिंग) पर आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे। इंग्लिश से 40, जनरल नॉलेज 50, मैथमेटिक्स से 20, लीगल एप्टीट्यूड से 40 तथा लॉजिकल रीजनिंग से 50 अंकों के प्रश्न होंगे। अन्य परीक्षाओं की तरह इसमें किसी तरह की निगॅटिव मार्किंग नहीं होगी। फिर भी परीक्षा भवन में सोच-समझकर और सावधानी से उत्तर दें। प्रश्नों के पैटर्न को अच्छी तरह से समझने के लिए एनएलएसआईयू-बंगलुरु द्वारा आयोजित पिछली प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्न-पत्रों का अवलोकन करें, जो इसकी वेबसाइट से मिल जाएंगे।
कैसे बनाएं स्ट्रेटेजी?
अंग्रेजी में सामान्यतया करेक्ट सेंटेंस, मीनिंग, एंटोनिम्स, सिनोनिम्स, इडियम्स ऐंड फ्रे जेज, कॉम्प्रिहेंशन तथा ग्रामर पर आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे। इनकी तैयारी के लिए दसवीं और बारहवीं कक्षा की किसी प्रामाणिक ग्रामर बुक की सहायता से अध्ययन करें और प्रश्नों को हल करने की अधिक से अधिक प्रैक्टिस करें। साथ ही अंगे्रजी के राष्ट्रीय समाचार पत्रों की मदद से अपना वर्ड पॉवर बढाएं। जनरल नॉलेज के तहत समसामयिक राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय घटनाओं, भारतीय इतिहास व संस्कृति, भारतीय अर्थव्यवस्था व राज्यव्यवस्था, भूगोल, आईपीसी, भारतीय संविधान, मानवाधिकार, सोशल इश्यूज, साइबर क्राइम आदि से प्रश्न पूछे जा सकते हैं। करेंट अफेयर्स की तैयारी के लिए किसी एक राष्ट्रीय अखबार का नियमित अध्ययन करें तथा अन्य विषयों की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की दसवीं से बारहवीं तक की पुस्तकें व दैनिक समाचार पत्र नियमित रूप से पढें। मैथमेटिक्स में दसवीं स्तर तक के सामान्य प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जैसे-एलसीएम, एचसीएम, कार्य और समय, समय तथा दूरी, लाभ-हानि, ब्याज, नंबर सिस्टम, प्रतिशत, औसत आदि। इसकी तैयारी के लिए दसवीं स्तर तक की गणित की अच्छी पुस्तक की सहायता से पढें और अधिक से अधिक सवालों को हल करने की प्रैक्टिस करें। लीगल एप्टीट्यूड आपके संभावित कोर्स को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण है, इसलिए इसकी तैयारी के प्रति विशेष सावधानी बरतें। वैसे इसमें सामान्य जागरूकता के ही प्रश्न पूछे जाएंगे, जैसे-भारतीय संविधान, भारत की राजनीतिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रणाली, इंडियन पैनल कोड की सामान्य जानकारी, उपभोक्ता मामले, लोकायुक्त, भ्रष्टाचार, श्रम कानून, चाइल्ड लेबर आदि। इसके लिए भारतीय संविधान पर आधारित डीडी बसु और सुभाष कश्यप की पुस्तकें पढें और दैनिक समाचार पत्रों से संबंधित खबरों की कटिंग कर अध्ययन करें। लॉजिकल रीजनिंग से आपकी समझ-बूझ की जांच की जाएगी। इसमें विषम संख्या की पहचान, कोडिंग-डीकोडिंग, कथन-कारण, वर्बल-नॉन वर्बल फीगर, दिशा, रिश्तों आदि पर आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इस भाग की बेहतर तैयारी मासिक प्रतियोगिता पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होने वाली बैंकिंग संबंधी सामग्री की मदद से की जा सकती है।
क्लैट स्कोर से प्रवेश लेने वाले संस्थान
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बंगलुरु, नगरभवी, बंगलुरु-560242, फोन : 080-23160532-33 वेबसाइट : www.nis.ac.in (उपलब्ध कोर्स : बीए, एलएलबी-ऑनर्स, 5 वर्षीय एकीकृत कोर्स )
नलसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद 3-4-7, 761, बरकतपुरा, हैदराबाद-500027, फोन : 040-27567955, 27567960 वेबसाइट : www.nalsarlawuniv.org (उपलब्ध कोर्स : बीए, एलएलबी-ऑनर्स, 5 वर्षीय एकीकृत कोर्स )
नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल कर्वा डैम रोड, भोपाल-462044, फोन : 0755-2686965, 2696705 वेबसाइट : www.nliu.com (उपलब्ध कोर्स : बीए, एलएलबी-ऑनर्स, 5 वर्षीय एकीकृत कोर्स )
द वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंस, कोलकाता एनयूजेएस भवन, 12, एलबी-ब्लॉक, सेक्टर-3, साल्ट लेक, कोलकाता-700098, फोन : 033-23350510 वेबसाइट : www.nujs.edu
(उपलब्ध कोर्स : बीए, एलएलबी-ऑनर्स, बीएससी, एलएलबी-ऑनर्स, 5 वर्षीय एकीकृत कोर्स )
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर एनएच-65, नागौर रोड, मंडोर, जोधपुर-342304, फोन : 0291-2577080 वेबसाइट : www.nlujodhpur.ac.in (उपलब्ध कोर्स : बीबीए, एलएलबी-ऑनर्स, बीए, एलएलबी-ऑनर्स, बीएससी, एलएलबी-ऑनर्स, 5 वर्षीय एकीकृत कोर्स )
गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद ई-4, जीआईडीसी, इलेक्ट्रॉनिक्स इस्टेट, सेक्टर-26, गांधीनगर-382028, फोन : 079-23243308, 23243296 वेबसाइट : www.gnlu. ac.in (उपलब्ध कोर्स : बीए, एलएलबी-ऑनर्स, बीएससी, एलएलबी-ऑनर्स तथा बीकॉम, एलएलबी-ऑनर्स, 5 वर्षीय एकीकृत कोर्स )
हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, रायपुर एचएनएलयू भवन सिविल लाइन्स, रायपुर-492001, फोन : 0771-4080114-17 वेबसाइट : www.hnlu.ac.in (उपलब्ध कोर्स : बीए, एलएलबी-ऑनर्स, 5 वर्षीय एकीकृत कोर्स )
यहां भी मिलेगा क्लैट से प्रवेश
4डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी लखनऊ-226012 वेबसाइट : www.nlulucknow.up.nic.in
राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, पंजाब , पटियाला-149001 वेबसाइट : www.rgnulpatiala.org
चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पटना-800001 वेबसाइट : www.cnlu.ac.in, www.chanakyalawuniv.org
लॉ कोर्स चलाने वाले अन्य प्रमुख कॉलेज/ विश्वविद्यालय
देश के प्राय: सभी विश्वविद्यालयों में लॉ के कोर्स (3 वर्षीय एलएलबी, 5 वर्षीय एलएलबी, एलएलएम और एमफिल/पीएचडी या एलएलडी) चलाए जाते हैं। यहां कुछ अन्य प्रमुख लॉ कॉलेजों के नाम दिए जा रहे हैं : 4इंडियन लॉ स्कूल (आईएलएस), पुणे यूनिवर्सिटी वेबसाइट : www.unipune.ernet.in
सिम्बॉयोसिस सोसायटीज लॉ कॉलेज (एसएसएलसी), पुणे वेबसाइट : www.symlaw.ac.in
दिल्ली यूनिवर्सिटी, फैकल्टी ऑफ लॉ वेबसाइट : www.du.ac.in
मुंबई यूनिवर्सिटी, गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ लॉ वेबसाइट : www.mu.ac.in
क्लैट आगामी 11 मई, 2008 को आयोजित किया जा रहा है।
इसे क्वालिफाई करने वाले अभ्यर्थियों को देश के सात नामी लॉ विश्वविद्यालयों के बीए-एलएलबी कोर्स में प्रवेश दिया जाएगा।
तीन साल के ग्रेजुएशन के बाद एलएलबी करने में तीन वर्ष और (यानी कुल छह वर्ष) लग जाता है।
बीए-एलएलबी का इंटीग्रेटेड कोर्स केवल पांच वर्ष में पूरा हो जाता है।
क्लैट के स्कोर के आधार पर आरजीएनएलयू-पंजाब, आरएमएलएनएलयू- लखनऊ तथा सीएनएलयू-पटना में भी एडमिशन दिया जाएगा।
कमी नहीं है विकल्पों की
आज से कुछ वर्ष पहले तक लॉ करने वाले अधिकांश स्टूडेंट्स के सामने एकमात्र विकल्प होता था-अदालतों में मुकदमों की पैरवी करना। हां, उनमें से कुछ प्रतियोगिता परीक्षाओं को क्वालिफाई करके सरकारी वकील बन जाते थे या फिर लोकसेवा आयोगों द्वारा आयोजित परीक्षाओं (पीसीएस-जे) को उत्तीर्ण कर जुडिशियल सर्विस का हिस्सा बन जाते थे। इस सेवा के जज आज भी अपने परफॉर्मेंस के आधार पर प्रोन्नति पाते हुए डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक के न्यायाधीश बनते हैं। डिस्ट्रिक्ट कोर्टों, हाई कोर्टों और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को अनुभव के साथ-साथ रुतबा और पैसा दोनों मिलता है। देश में बडी संख्या में अदालतें होने के कारण इस क्षेत्र में बडी संख्या में लॉ ग्रेजुएट आते रहे हैं। अनुभवी एडवोकेट सरकारी विभागों और निजी कंपनियों के लिए लीगल कंसल्टेंट का काम भी करते रहे हैं। राज्य और केंद्र सरकारों में एटॉर्नी जनरल भी लीगल सेक्टर के एक्सपर्ट और बेहद अनुभवी होते हैं। एजुकेशन और रिसर्च से जुडे रहने के इच्छुक युवाओं के लिए एलएलएम और पीएच।डी. करने के बाद टीचिंग प्रोफेशन भी एक बढिया विकल्प है। कॉर्पोरेट सेक्टर ने लॉ की पढाई करने वालों के लिए तमाम राहें खोल दी हैं।

भारतीय एकता संगठन परिवार

ऑनलाइन पढ़ाई की जानकारी

बिहार के एक सुदूर गांव में रहती है-सरस्वती। दसवीं में पढने वाली सरस्वती अखबार और टीवी में अक्सर दिल्ली, मुंबई, पुणे, बंगलुरु, हैदराबाद जैसे महानगरों में पढाई करने वाली लडकियों की तस्वीरें देखती है। वह हमेशा सोचती रहती है काश! वह भी इन बडे शहरों के कॉलेजों में पढाई कर पाती! सरस्वती का ऐसा मानना है कि यदि वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के किसी ख्याति प्राप्त कॉलेज में पढाई करे, तो उसे बडे शहरों में नौकरी मिलने में भी आसानी होगी! हमारे देश में सरस्वती जैसे लाखों किशोर व युवा हैं, जो महानगरों के स्कूल-कॉलेजों में पढाई करने का ख्वाब देखते हैं। लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उनका यह सपना हकीकत में कम ही बदल पाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उच्चस्तरीय कॉलेजों की पढाई को ग्रामीण लोगों के द्वार तक पहुंचाने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने ई-यूनिवर्सिटी की स्थापना की है। ई-यूनिवर्सिटी अपने सैटेलाइट एडुसेट के जरिए उच्चस्तरीय शिक्षा को एक क्लिक पर कम्प्यूटर या टेलीविजन के माध्यम से दूर-दराज के लोगों तक पहुंचा रही है।
क्या है ई-यूनिवर्सिटी?
अभी भी गांवों में रहने वाले युवाओं को कॉलेज की पढाई के लिए या तो मीलों चलकर कस्बे के महाविद्यालय में जाना होता है या फिर पढाई करने के लिए अपने घर-परिवार से दूर शहर में जाना पडता है। इसके लिए उनके रास्ते में अन्य तमाम मुसीबतें भी आती हैं। इसलिए यूजीसी ने एक योजना के तहत एक ऐसी यूनिवर्सिटी का गठन किया है, जिसमें न तो परंपरागत कॉलेज की तरह किसी बडे आधारभूत ढांचे की जरूरत है और न ही लाखों-करोडों रुपये खर्च करने की! बेहद कम खर्च में देश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले विद्यार्थी घर बैठे देश के ख्याति प्राप्त विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स के लेक्चर्स का लाभ उठा सकेंगे।
कैसे होगी पढाई
दरअसल, यूजीसी की योजना के मुताबिक आने वाले दिनों में ई-यूनिवर्सिटी में सैटेलाइट के जरिए कॉलेज की पढाई उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे स्टूडेंट्स को पढाई के लिए कहीं दूर नहीं जाना पडेगा, बल्कि वे अपने घरों में बैठकर ही टेलीविजन और इंटरनेट के जरिए पढाई पूरी कर लेंगे। वे जब चाहें, तब एक निश्चित वेब पेज खोलकर अपने विषय का अध्ययन कर सकते हैं। ई-लर्निग में अलग-अलग विषयों की हार्ड कॉपी को सॉफ्ट कॉपी (ई-कॉपी) में बदला जाता है। कहने का मतलब यह है कि आप अपने वेब पेज को खोलकर अपने मनचाहे विषय के ऑप्शन पर क्लिक कर उसे पढ सकते हैं। इसमें स्टूडेंट्स को कठिन लगने वाले सवालों के कई ऑप्शन मौजूद रहते हैं, जिसे क्लिक कर वह अपनी समस्याओं का समाधान कर सकता है। इसमें ऑनलाइन एग्जाम्स की भी व्यवस्था होती है।
टेक्निक का कमाल है ई-यूनिवर्सिटी
ई-यूनिवर्सिटी के तहत दिल्ली स्थित मेन स्टडी सेंटर सहित कुल 17 इलेक्ट्रिनिक मल्टी मीडिया रिसर्च सेंटर्स (ईएमएमआरसी) हैं, जहां सैटेलाइट के जरिए क्लासेज की व्यवस्था की गई है। इसके अन्य सेंटर्स जिन शहरों में स्थित हैं, उनके नाम हैं- अहमदाबाद, कोलकाता, हैदराबाद(ईएफएलयू),हैदराबाद (उस्मानिया यूनिवर्सिटी), जोधपुर, मदुरै, पुणे, कालीकट, चेन्नई, इम्फाल, इंदौर, मैसूर, पटियाला, रुडकी, सागर, श्रीनगर आदि। यूजीसी का अपना सैटेलाइट लिंक (एडुसेट) भी है, जो दिल्ली और अन्य सेंटर्स को आपस में जोडता है। इसी की सहायता से स्टडी प्रोग्राम का प्रसारण होता है। यदि एक पंचायत के पास डीटीएच (डायरेक्ट टू होम) का एंटीना है, तो उस पंचायत के सभी गांव के छात्र-छात्राएं टेलीविजन की सहायता से पढाई कर पाएंगे। यदि वहां इंटरनेट की सुविधा भी उपलब्ध हो, तो यह उनके लिए और भी लाभप्रद होगा। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप इस पते पर सम्पर्क कर सकते हैं : कन्सोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन, एनएससी कैम्पस, अरुणा आसफ अली मार्ग नई दिल्ली (फोन : 011-2897418, 26897419, ई-मेल : cecugc @cec-ugc.org)
करियर की भी खुली नई राह
ई-यूनिवर्सिटी के इस काम को आसान बनाने के लिए बडी संख्या में प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होगी। अलग-अलग विषयों की हार्ड कॉपी को ई-कन्टेंट में बदलना, टेक्स्ट का कम्पाइलेशन, भिन्न-भिन्न सॉफ्टवेयर्स का सेटअप, नॉन-लीनियर एडिटिंग, कैमरा हैंडलिंग आदि अनेक कार्य हैं, जिसके लिए ट्रेंड लोगों की दरकार होगी है। साइंस, टेक्नोलॉजी और एकेडमिक्स के एक्सप‌र्ट्स इस क्षेत्र में समुचित काम पा सकते हैं।
कौन-कौन से हैं काम?
ई-कन्टेंट (स्टडी मैटीरियल) को तैयार करने के लिए कार्यो को दो भागों में बांटा गया है-कन्टेंट डेवलॅपमेंट और प्रोग्राम डेवलॅपमेंट। ई-यूनिवर्सिटी के सभी कार्य इन्हीं दो भागों के इर्द-गिर्द घूमते हैं। इसमें जो प्रमुख पद होंगे, उनके नाम इस प्रकार हैं : ई-कन्टेंट डेवलॅपर, कोर्स कोऑर्डिनेटर, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, पे्रजेंटर, रिसोर्स पर्सन, स्टूडियो इन चार्ज, नॉन-लीनियर एडिटर, मल्टीमीडिया प्रोग्रामर, कैमरामैन, डेटा एंट्री ऑपरेटर आदि।
आरंभिक कमाई
यदि आप अच्छे एकेडमिक रिजल्ट के साथ-साथ टेक्निकल स्किल में भी महारत रखते हैं, तो फिर आपको इस फील्ड में आकर्षक वेतनमान मिल सकता है। यहां सैलरी की शुरुआत 12-15 हजार रुपये से होती है। इसकेअलावा, ऊंचे पदों पर 40-50 हजार रुपये तक मिल सकते हैं।
स्टूडेंट्स के लिए बेहतर विकल्प
भारत में 4 करोड 20 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। यदि उन बच्चों को स्कूल और कॉलेजों में डाला जाए, तो दस लाख अतिरिक्त क्लास रूम, उतनी ही संख्या में टीचर, यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, लेक्चरर आदि की जरूरत पडेगी। साथ ही, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी अरबों रुपये खर्च करने पडेंगे। ऐसी स्थिति में भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश के लिए ई-यूनिवर्सिटी एक बेहतर विकल्प है। अमेरिका और ग्रेट-ब्रिटेन आदि जैसे देशों में ई-यूनिवर्सिटी सफलतापूर्वक चलाई जा रही है।
स्मिता
समय की मांग है ई-लर्निग
ई-यूनिवर्सिटी की शुरुआत कैसे हुई?
यूजीसी 15 अगस्त, 1984 से दूरदर्शन के माध्यम से देश भर में एजुकेशनल टीवी प्रोग्राम प्रसारित कर रहा है। इससे छोटे शहरों, कस्बों, गांवों आदि में रहकर पढाई कर रहे युवा लाभान्वित होते रहे हैं। भारत को नॉलेज सुपर पॉवर बनाने के लिए दूर-दराज के इलाकों को कॉलेज शिक्षा से जोडना अत्यंत आवश्यक है। इस लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग दिया है टेलीविजन और इंटरनेट की दुनिया ने। इसी का परिणाम आज ई-यूनिवर्सिटी के रूप में सबके सामने है। इससे गांव-देहात के लोग घर बैठे कॉलेज के एक्सप‌र्ट्स के व्याख्यान को देख और सुन सकेंगे। वे चाहें, तो उनसे ऑनलाइन प्रश्न भी पूछ सकते हैं।
क्या ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं को इसका लाभ उठाने के लिए अधिक पैसा खर्च करना होगा?
नहीं, इससे लाभ पाने के लिए बहुत कम पैसा खर्च करना होगा। इसके लिए प्रत्येक पंचायत के पास एक डीटीएच एंटीना, अधिक पॉवर वाला जेनरेटर और इंटरनेट की सुविधा होनी चाहिए।
ई-लर्निग के माध्यम से कौन-कौन से कोर्स संचालित किए जाते हैं?
शुरुआत में हमारे यहां डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स की व्यवस्था की गई है। इन कोर्सो के तहत आप एडिटिंग, मार्केटिंग, लाइब्रेरी मैनेजमेंट आदि का डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। हालांकि, आने वाले समय में आप ग्रेजुएट तथा पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री ई-यूनिवर्सिटी के जरिए ले सकते हैं।
कैसे पढाएंगे विशेषज्ञ?
दरअसल, मुख्य सेंटर्स पर विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को लेक्चर्स के लिए हायर करते हैं। कई विशेषज्ञ हमारे यहां पार्ट-टाइम भी काम कर रहे हैं। यदि किसी विषय का व्याख्याता हैदराबाद का है, तो हम वहीं उनका क्लास रिकॉर्ड कर सभी सेंटर्स पर टेलीकास्ट करवा देते हैं।
छोटे शहरों के लिए क्या योजना है?
आने वाले दिनों में छोटे शहरों में भी स्टडी सेंटर्स खोले जाएंगे। इससे छात्रों को भाषाई समस्या का सामना नहीं करना पडेगा। उदाहरण के लिए यदि कोई मलयाली भाषा में अपने कोर्स मैटीरियल को समझना चाहता है, तो स्टडी सेंटर पर उसी भाषा के जानकार से संबंधित विषय पर व्याख्यान दिलवाया जाएगा। इससे रीजनल भाषा का ज्ञान रखने वाले छात्रों को भी लाभ हो सकेगा।
क्या इसके लिए लेक्चरर को कोई विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी?
कई बार ऐसा होता है कि अपने विषयों में पारंगत होने के बावजूद लोग कैमरा फ्रेंडली नहीं होते हैं। उन्हें कक्षा में बिना स्टूडेंट के लेक्चर देने में असुविधा होती है। इसलिए टेक्निकल ट्रेनिंग के साथ-साथ उन्हें कैमरा फ्रेंडली होने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

भारतीय एकता संगठन

शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

बाल का रखे ख्याल

बालों को स्वस्थ रखने के लिए मौसम के अनुसार देखभाल भी जरूरी होती है। गर्मियों में जहां आप हर रोज बालों को धोना पसंद करती हैं और उन्हें अमूमन बांधकर रखना पसंद करती हैं, तो वहीं सर्दियों में हर रोज बालों को धोना संभव नहीं हो पाता। सर्दियों में बालों को खोलकर रखने से उनमें प्रदूषण के साथ नमी भी जमने लगती है जो सिर की त्वचा पर धीरे-धीरे जमने लगती है। इस कारण सिर की त्वचा के छिद्र बंद हो जाते हैं और बाल अत्यधिक तैलीय या रूखे लगने लगते हैं। आप ऐसे में संतुलन कैसे बैठाएं ताकि बाल रेशम से लहराते रहें, जानें।
1. बालों का टूटना सर्दियों की सबसे अहम समस्या होती है। इसका नाता बालों की देखभाल से नहीं होता, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने सर्द हवाओं से बचने के लिए क्या पहना है। वूल हैट्स, गर्म टोपी, स्कार्फ लपेटने के कारण भी बाल गले में और कपडे में फंसकर बीच-बीच में टूट जाते हैं। इसलिए वूल कैप लगाने के बजाय रेशमी या सैटिन स्कार्फ चुनें।
ृ2. घर और बाहर प्रयोग किए जाने वाले हीटर उपकरणों के कारण भी बाल रूखे हो सकते हैं। इसलिए इस रूखेपन से दूर रहने के लिए एक्स्ट्रा डीप कंडीशनर का प्रयोग करें। इसे हफ्ते में एक बार इस्तेमाल करें। ऐसे हेयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें जो बालों में मॉयस्चर स्तर को बनाए रखे।
3. बालों को सुखाने या स्टाइल बनाने के लिए आयरन, ब्लो ड्रायर और कर्लिग आयरन का भूल कर भी इस्तेमाल न करें। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि स्कार्फ या कैप पहनने से पहले वे पूरी तरह सूख चुके हों।
4। अगर सर्दियों में बालों को बांध कर रखती हैं, जूडा बानाती

विभा शुक्ला
भारतीय एकता संगठन

जानकारी परिवार से

उफ, इन पुरुषों को सुधारने की कोशिश ही बेकार है। ये उद्गार किसी एक स्त्री के नहीं अनेक स्त्रियों के होंगे। इसी गंभीर समस्या को लेकर सखी ने बातचीत की कुछ स्त्रियों से और इस बात की तह तक जाने की आखिर परेशानी कहां है?
हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पहले जैसी आसान नहीं रही। बढती व्यस्तता और जिम्मेदारियों के बोझ ने स्त्री, विशेषकर कामकाजी स्त्री को और कठिन परिस्थितियों में ला खडा किया है। ऐसे में जहां उसकी कार्यक्षमता पहले से दोगुनी हुई है, वहीं चुनौतियों और जिम्मेदारियों में भी खासी बढोतरी हुई है। आइए काउंसलर डॉ.अनु गोयल से जानें कि समस्या है कहां और इनका हल क्या है?
अनुशासन की कमी
मल्टीनेशनल कंपनी की कंट्री हेड के जिम्मेदार पद को बखूबी संभालने वाली रूपाली अपने चार जनों के परिवार को संभालने में अक्षम साबित हो रही थी। उसका कहना था कि सास अपने बेटे और इकलौते पोते का इतना लाड करती हैं कि दोनों अनुशासन का अ भी नहीं जानते। घर की कोई भी चीज जगह पर नहीं मिलेगी चाहे वे महत्वपूर्ण कागजात ही क्यों न हों। कुछ भी कहने या नाराज होने की कहीं गुंजाइश नहीं क्योंकि सुरक्षा कवच लगा कर सास खडी होती हैं। अब घर के सभी सदस्यों के साथ तो अकेला इंसान लड नहीं सकता। अकेला चना भाड नहीं फोड सकता। मुसीबत तो यह थी कि उसका पांच साल का बेटा तो नासमझ था, लेकिन पति तो पढा-लिखा था। फिर उसे यह तकलीफक्यों नहीं समझ में आती। हजार बार कोशिश करने पर भी हालात वहीं के वहीं थे। उन्हें इस तरीके में ज्यादा आराम व सुविधा थी इसलिए वह बदलाव लाने को तैयार नहीं थे। यह समझने की कोशिश भी नहीं कर रहे कि यह बात आगे चलकर बच्चे के लिए कितनी नुकसानदेह है।
काउंसलर : इसमें संदेह नहीं कि आराम और सुविधा कौन नहीं चाहता। ये भारतीय संयुक्त परिवारों की आम समस्या है। बच्चे को व्यस्त रखें और आत्मनिर्भर बनाएं। कोशिश करें कि घर की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति पर हो।
गंदगी का आलम
मोना पति के बिजनेस में हाथ बंटाने वाली पढी लिखी लडकी है। मुंबई के शानदार फ्लैट में रहने वाली मोना का कहना है कि इतने सुंदर घर का क्या फायदा। जहां देखो वहीं गीली गंदी चप्पल के निशान नजर आ जाएंगे। बाहर के जूते पहनकर घर में घूमने से पूरे घर में गंदगी फैली रहती है। जहां काम करेंगे वहीं आसपास कागज के टुकडे मिल जाएंगे। पहने हुए कपडे कभी उतार कर धुलने के लिए नहीं डालेंगे।
काउंसलर: देखिए कुछ आदतें इनबिल्ट होती हैं। उन्हें दूर करना काफी कठिन होता है। एक बाथरूम स्लीपर टॉयलेट के बाहर रख सकती हैं। बच्चों को लगातार सिखाएं। चाहें तो सजा के रूप में जगह पर कपडे न रखने पर, एक सप्ताह तक उनके कपडे बिना धुले रहने दें।
टी.वी. से प्रेम
माना कि टेलीविजन मनोरंजन के साथ संचार का बेहतर माध्यम है, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि संसार की खबरें देखते-देखते आप घर की दुनिया से बेखबर हो जाएं। यह समस्या है आस्था की। वह सारे दिन बेसब्री से इंतजार करती कि शाम को विक्रम के आने पर यह बात कहेगी, उस मसले पर डिस्कस करेगी, लेकिन शाम होने तक हालात ही बदले होते। पति आते ही बैग थमा रिमोट ले टीवी ऑन कर ज्यों उसके सामने बैठते फिर वहां से उन्हें हिलाना एकदम नामुमकिन था। चाय भी वहीं और खाना भी वहीं। यदि डाइनिंग टेबल पर बैठ कर डिनर करने का आग्रह करे तो फिर देर रात का इंतजार करना होगा। अब बच्चों की भी टी.वी. देखते हुए खाने-पीने की आदत हो गई।
काउंसलर : अकसर पुरुष पत्नी को नजरअंदाज करने के लिए भी यह करते हैं। पत्नी की बात सुनो फिर अपने ऊपर जिम्मेदारी लो इससे अच्छा है कि टी.वी. पर ध्यान लगाओ। थोडा कठिन है उन्हें वापस लाना, लेकिन कोशिश आपको करनी होगी। इस समस्या में बच्चों की मदद लेना बेहतर होगा।
बाथरूम सिंगर
मुझे नहीं पता कि यह समस्या मेरे जैसी कितनी पत्नियों को होगी। सुबह घर में घर से निकलने की मारामारी होती है उस पर पतिदेव हैं कि बाथरूम में एक बार चले जाएं तो मुकेश के सभी गीत गाने के बाद ही बाहर आएंगे। अब आपको देर हो रही है तो इसमें वह क्या करें। बेटी रीना का कहना है कि मम्मी प्लीज पापा को बोलो यह काम रात को कर लिया करें। मेरा लेक्चर मिस हो जाता है। राहुल के साथ मुझे भी ऑफिस पहुंचने की जल्दी होती है। सवाल तैयार होने का नहीं ब्रेकफस्ट का है। यदि लंच नहीं पकडाया तो बिना लंच चले जाएंगे। यदि नाश्ता हाथ में नहीं दिया तो बिना खाए चले जाएंगे। ये शिकायत है बैंक अफसर इरा की।
काउंसलर: पीछे-पीछे मत फिरिए। थोडा छोड कर देखिए कि क्या होता है? यदि आपकी कोशिशें नाकाम हैं तो प्रोफेशनल हेल्प लें। वैसे हर व्यक्ति को अपने लिए अलग स्पेस चाहिए होता है।
लापरवाही का कोई अंत नहीं
क्या कभी आपने सुना है कि कोई व्यक्ति रात साढे गयारह बजे पेट्रोल पंप पर खडा हो और पर्स उसकी जेब में न हो। पेट्रोल की सुई कब की नीचे पहुंच इशारा कर चुकी थी, लेकिन यह साहब थे कि इन्हें होश नहीं। ऑफिस से करीब डेढ किलोमीटर तक गाडी किसी तरह खींच वहां तक पहुंचने पर पता चला कि पर्स तो आज बेगम ने रखा ही नहीं। आख्िार घडी उतार कर पेट्रोल पंप वाले को देनी पडी। घर आकर झल्लाहट निकालने पर पत्नी ने कहा कि यदि मैं पर्स नहीं रखूं तो तुम क्या करोगे और तो और चौबीस घंटे खुले रहने वाले ए.टी.एम. भी इनके सामने बेकार हैं क्योंकि इन्हें पैसे निकालने आते नहीं। यह हैं हमारे साहब। परेशान होकर लता ने अपना दुखडा रोया। स्वयं एक प्रतिष्ठित मीडिया कंसर्न से जुडी लता के पति भी मीडिया पर्सन थे।
काउंसलर: शादी के चौदह सालों में आपने जो आदतें पति को डाल दी हैं उनका खामियाजा आपको ही भुगतना होगा। उन्हें जिम्मेदार बनाने की जगह आपने उन्हें लापरवाह और गैर जिम्मेदार बना दिया है।
बचकाना व्यवहार
यूं तो सब ठीक है लेकिन मेरे पति को बच्चा बनते देर नहीं लगती। स्कूल में अध्यापन कर रही भारती का कहना था। ऑफिस में वह भले ही बॉस हों, लेकिन जरा सा सर्दी-जुकाम होते ही बच्चे बन जाते हैं। कहीं हिलने की इजाजत नहीं होती। कभी सिर दबाओ तो कभी डॉक्टर बुलाओ। थोडा सा सब्र तो होना ही चाहिए। तौलिया नहीं मिल रहा तो हल्ला, चप्पल नहीं मिल रही तो हल्ला, और तो और अखबार यदि समय पर नहीं आया तो भी परेशानी। अब इसमें मेरा क्या कसूर?
काउंसलर: हर व्यक्ति के भीतर उसका बचपन छिपा रहता है, जो जरूरत पडने पर कभी भी बाहर आ जाता है। आपको थोडा व्यावहारिक बनना होगा। उन्हें वयस्क की तरह व्यवहार करने दें। थोडी मजबूती और कठोरता आपको अपने भीतर लानी होगी।
व्यावहारिकता से कोसों दूर
बडे अजीब आदमी हैं जरा सी भी व्यावहारिकता नहीं। घर में कोई भी आए या जाए उन्हें कोई फर्क नहीं पडता। उनके रिश्तेदार आएं तो भी मुझे देखना है और मेरे मिलने वाले आएं तब तो मुझे देखना है। मेरी कजन विदेश से आई यह नमस्ते करने के बाद ज्यों अंदर गए वापस बाहर आने का नाम ही नहीं लिया। वह पूछने लगी कि क्या उन्हें मेरा आना अच्छा नहीं लगा। मैंने सफाई दी, लेकिन शायद वह झेंप मिटाने के बहाने भर थे। कई बार उनकी इस आदत के कारण इतनी खराब स्थिति हो जाती है कि कुछ कहते नहीं बनता।
काउंसलर: यह आदत बदलनी थोडी कठिन है। आपको इसे समझ कर दूसरों को भी समझाना पडेगा। उनकी कमी को अपने व्यवहार से पूरा करने की कोशिश करें।
ये आदतें या व्यवहार किसी पत्नी के लिए मुश्किलें खडी करने वालीं हैं ही। लेकिन समस्या की जड में जाकर देखें कि कहीं आप स्वयं तो इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। तो फिर उन्हें सुधारने के साथ-साथ अपने को भी सुधारें।

संध्या मिश्रा
भारतीय एकता संगठन

जानकारी

देश भर में महिला वैज्ञानिकों को बढावा देने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी, भारत सरकार ने महिलाओं को स्कॉलरशिप देने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य साइंस, इंजीनियरिंग और मेडिसिन में हो रही वैज्ञानिक खोज और शोध में महिलाओं को बढावा देना है। इसके तहत प्रतिभाशाली महिलाओं को चुनकर एक वर्ष की ट्रेनिंग दी जाएगी। टेक्नोलॉजी इन्फॉरमेशन के पेटेंट फेसिलिटेटिंग सेंटर (पीएफसी), फॉरकास्टिंग ऐंड असेसमेंट काउंसिल (टीआईएफएसी) भी इसमें को-ऑर्डिनेट करेंगे।
योग्यता
कैंडिडेट भारतीय नागरिक हो।
साइंस में मास्टर डिग्री/फिजिकल साइंस, केमिकल साइंस, लाइफ साइंस में पीएचडी/इंजीनियरिंग, मेडिसिन, फार्मास्युटिकल साइंस, वेटेरिनरी साइंस में से बैचलर या मास्टर डिग्री।
हायर क्वालिफिकेशन वाले कैंडिडेट्स को प्राथमिकता दी जाएगी।
कम्प्यूटर डेटाबेस, नेट सर्फिग की जानकारी आवश्यक है।
31 अक्टूबर 2009 तक उम्र 50 वर्ष से अधिक न हो।
रिसर्च, प्रोजेक्ट रिपो‌र्ट्स तैयार करने का भी अनुभव हो।
आवेदन
एप्लीकेशन फॉर्म और इसके फॉर्मेट की सूचना दिसंबर की शुरुआत में प्रतिष्ठित अखबारों में दी जाएगी।
एप्लीकेशन फॉर्म अधूरा नहीं होना चाहिए।
यदि आपके पास डिटेल्स उपलब्ध नहीं है, तो कॉलम के सामने नॉट एप्लिकेबल/निल लिखें।
एप्लीकेशन फॉर्म में अपना साइन जरूर करें। बिना साइन किया हुआ एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाएगा।
आवेदन पत्र को डाक से भेजें। ई-मेल या फैक्स स्वीकृत नहीं किए जाते।
लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के लिए किसी एक कॉर्डिनेशन सेंटर का चुनाव करें। यदि आपका चुनाव हो जाता है, तो वह सेंटर आपकी ट्रेनिंग की व्यवस्था करेगा।
सुविधा
एमएससी/बीटेक/एमबीबीएस/बीफार्मा वाले कैंडिडेट को 12,500 रुपये प्रति महीने दिए जाएंगे।
पीएचडी/एमटेक/एमफार्मा/एमएस/ एमडी/एम9 वीएससी वाले कैंडिडेट को 17,500 रुपये महीने दिए जाएंगे।
लॉ फ‌र्म्स, नॉलेज प्रोसेसिंग ऑर्गनाइजेशंस और विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा 10 महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
कोऑर्डिनेशन सेंटर्स, चेन्नई, सेंटर फॉर कोऑपरेशन इन साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी एंड डेवलपिंग सोसाइटीज गांधी मंडपम रोड, दिल्ली
पेटेंट फेसिलिटेटिंग सेंटर, टेक्नोलॉजी इंर्फोमेशन, फॉरकास्टिंग ऐंड असेसमेंट काउंसिल विश्वकर्मा भवन, ए-विंग, शहीद जीत सिंह मार्ग, खडगपुर कंटिन्यूइंग एजूकेशन प्रोग्राम , पुणे यूनिट फॉर रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑफ इन्फॉरमेशन प्रोडक्ट्स,काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, जोपासना, 85/1, पुणे
चयन प्रक्रिया
लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर योग्य उम्मीदवारों का चुनाव होगा। नई दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और पुणे में लिखित परीक्षा आयोजित होगी। अधिक जानकारी के लिए www.tifac.org.in देख सकते हैं।
टीआईएफएसी
टेक्नोलॉजी इन्फॉरमेशन, फोरकास्टिंग ऐंड असेस्मेंट काउंसिल (टीआईएफएसी) एक स्वायत्त संस्था है, जो वर्ष 1988 में डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी के अंतर्गत स्थापित हुई है। यह देश भर में होने वाली वैज्ञानिक खोजों और अनुसंधानों को प्रोत्साहित और संचालित करती है।

पूनम मिश्रा
महिला विंग
भारतीय एकता संगठन

मंगलवार, 24 नवंबर 2009

सौंदर्य

सर्दियों का मौसम यूं तो बडा ही रूमानी होता है, लेकिन सौंदर्य की दृष्टि से उतना ही नुकसानदेह होता है। इस मौसम में त्वचा और सौंदर्य का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। दरअसल सर्द और शुष्क हवाएं त्वचा को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं, क्योंकि ये त्वचा की कुदरती नमी को चुरा लेती हैं। जिससे त्वचा खिंची-खिंची, रूखी और बेजान सी नजर आने लगती है। इस मौसम में त्वचा संबंधी कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं, लेकिन आप चाहें तो कुछ कारगर टिप्स और नियमित देखभाल से त्वचा की खोई हुई नमी और चमक को वापस लौटा सकती हैं।
सामान्य त्वचा
ऐसी त्वचा को क्लीनिंग, नरिशिंग और मॉयस्चराइजिंग की जरूरत होती है।
क्या करें
1. सुबह चेहरा धोने के बाद गुलाबजल या एल्कोहॉल फ्री एस्ट्रिंजेंट टॉनिक लगाकर चेहरे को ताजगी प्रदान करें। फिर माइल्ड नॉन-ग्रीसी क्रीम लगाकर जरूरी नमी प्रदान करें।
2. अच्छी क्वालिटी के मेकअप प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें। सोने से पहले मेकअप हटाना न भूलें। माइल्ड सोप से चेहरा साफ करें। उसके बाद ऑयल बेस्ड नरिशिंग क्रीम लगाएं। 15 मिनट बाद नैपकिन से चेहरा पोंछ लें।
3. हफ्ते में एक बार अंडे की जर्दी का मास्क या कोई और मॉयस्चरयुक्त मास्क लगाएं ताकि त्वचा पुनर्जीवित हो जाए।
रूखी त्वचा
रूखी त्वचा को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। आपको अपने लिए रिच स्किन केयर प्रोडक्ट चुनने चाहिए जैसे शीया बटर, एक्स्ट्रा-वर्जिन कोकोनट ऑयल या होममेड हर्बल ऑयल।
1. इन्हें हफ्ते में दो बार चेहरे पर लगाएं।
2. अगर रूखे पैचेज चेहरे पर होने लगे या त्वचा फटने लगे तो एक चम्मच ग्लिसरीन में एक चम्मच गुलाबजल मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएं। फिर कॉटन को गीला करके निचोडें और हलके हाथों से मलकर लगाएं। ऐसा नियमित रूप से तब तक करें जब तक कि त्वचा साफ और चिकनी न हो जाए। पानी से धोने के बाद मॉयस्चराइजर लगाएं।
तैलीय त्वचा
आपको अपनी त्वचा को पोषण देने के साथ ही बडे छिद्रों को साफ करने, नमी प्रदान करने और एक्ने से बचाने के लिए अतिरिक्त ऑयल को कम करने पर ध्यान देना जरूरी है। इसलिए इन उपायों को अपनाएं।
क्या करें
1. त्वचा को दिन में 2-3 बार धोएं, लेकिन माइल्ड सोप का केवल एक बार ही प्रयोग करें। वरना तैलीय ग्रंथियां सक्रिय होकर अत्यधिक सीबम बनाने लगेंगी।
2. हमेशा नॉन ग्रीसी मॉयस्चराइजर इस्तेमाल करें और एल्कोहॉल फ्री हर्बल टॉनिक से चेहरे को टोन करें, जो त्वचा का स्वास्थ्य और नमी का संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।
3. हफ्ते में एक बार 10 मिनट तक ठंडे पानी से चेहरा खूब अच्छी तरह धोएं।
4. अगर एक्ने की समस्या है तो अपनी डाइट से चीनी और कार्बोहाइड्ेट निकाल दें।
मिली-जुली त्वचा
ऐसी त्वचा की देखभाल करना थोडा मुश्किल होता है, क्योंकि यह तैलीय और रूखी दोनों ही होती है। इन दोनों ही स्थितियों में अलग-अलग ध्यान देना पडता है। फेशियल हिस्से (माथा और नाक) के लिए ऑयली ट्रीटमेंट करें और आंखों और गालों के लिए रूखी त्वचा वाला ट्रीटमेंट करें।
क्या करें
1. दिन में एक बार माइल्ड फेशियल सोप या क्लींजर से चेहरा साफ करें।
2. क्लीनिक कंपनी का टोनर तैलीय हिस्सों पर लगाएं।
3. टी-जोन हिस्से पर लाइट मॉयस्चराइजर लगाएं ताकि छिद्र बंद न होने पाएं।
4. मॉयस्चराइजर लगाने के बाद मैट-फिनिश प्राइमर लगाएं। यह आपके टी-जोन को शाइन फ्री रखेगा।
5. खुले और बडे छिद्रों को कम करने के लिए हफ्ते में एक बार ऑयली स्किन के लिए बना मास्क और स्क्रब अपने माथे, गाल और नाक पर लगाएं।
संवेदनशील त्वचा
ऐसी त्वचा हमेशा रूखी और समस्या युक्त होती है। इसलिए विशेष देखभाल बहुत जरूरी है।
क्या करें
1. इस बात पर विशेष ध्यान दें कि आप क्या खा रही हैं। विशेषकर फैटी एसिड, ऑर्गेनिक प्रोटीन, दही और लैक्टो फर्मेटेड फ्रूटस (रुड्डष्ह्लश्र-स्नद्गह्मद्वद्गठ्ठह्लद्गस्त्र स्नह्मह्वद्बह्लह्य) और सब्जियों में आप कितना और क्या ले रही हैं।
2. ऐसे प्रोडक्ट न इस्तेमाल करें जिनमें पेट्रोलियम की मात्रा हो। नैचरल या ऑर्गेनिक स्किन केयर रेंज लें।
3. वही खाएं जो आपको सूट करता हो ताकि एलर्जी की समस्या न होने पाए।
4. त्वचा को धूप के सीधे संपर्क में आने से बचाएं। धूप में निकलने से पहले ऑर्गेनिक सनस्क्रीन एसपीएफ 30 या उससे अधिक लगाएं।
खूबसूरत पैरों के लिए
अमूमन स्त्रियां अपने पैरों के सौंदर्य को नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन पैर हमारे शरीर का पूरा भार उठाते-उठाते थक जाते हैं। कभी उन्हें हाई हील पर तनना पडता है तो कभी टाइट स्ट्रैप के साथ दबना पडता है। दिन खत्म होते-होते पैर थक कर चूर हो चुके होते हैं। सर्द मौसम का प्रभाव पैरों पर भी पडता है। एडियां फटना सर्दियों की सबसे अहम समस्या होती है। ऐसे में बेहतर फुट स्पा से पैरों को आराम और सौंदर्य दोनों दिया जा सकता है।
क्या करें
1. हर दूसरे दिन पर रात में सोने से पहले हलके गर्म पानी में नमक डालकर अपने पैरों को दस-पंद्रह मिनट तक डुबोएं। फिर अच्छी तरह पोंछकर फुटक्रीम लगाएं।
2. रोजाना अपने पैरों में खूब अच्छी तरह मॉयस्चराइजर, लोशन या फुटक्रीम लगाकर कुछ देर गोलाई में हाथ घुमाते हुए मालिश करें। ताकि पैरों की त्वचा कोमल बनी रहे।
3. पैरों के नाखूनों का आकर्षण बढाने के लिए नेलकलर लगाएं। इसके लिए टो-नेल सेपरेटर का प्रयोग करें। ताकि नेलपॉलिश एक-दूसरे से टच न हो। अगर आपके पास टो-नेल सेपरेटर नहीं है तो टिश्यू पेपर को रोल करके प्रत्येक उंगली के बीच में लगाएं।
4. नाखूनों का स्वाभाविक रंग पीला न पड जाए इससे बचने के लिए उस पर बेस कोट लगाएं।
5. जब भी कभी अपना पसंदीदा कार्यक्रम देखें, अपनी स्पा किट निकालें और पैरों को गर्म पानी के टब में डालकर बैठ जाएं।
चेहरे के दाग
यह पिग्मेंटेशन का बिगडा हुआ रूप होते हैं। साथ ही यह धूप के संपर्क में आने से बढ जाते हैं। दरअसल सर्दियों में स्त्रियां अकसर धूप से सुरक्षा के उपाय कम ही अपनाती हैं जिस कारण यह समस्या बढ जाती है। गोरी त्वचा पर फे्रकल्स जल्दी पडते हैं क्योंकि उसमें मेलानिन की कमी के कारण त्वचा यूवी किरणों को जल्दी जज्ब कर लेती है। इस तरह त्वचा पर दाग बढ जाते हैं।
क्या करें
ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन रोजाना लगाएं। ऐसे प्रोडक्ट्स चुनें जिनमें जिंक ऑक्साइड, टिर्टेनियम डाइऑक्साइड हो। यह तत्व यूवीए और यूवीबी दोनों किरणों को त्वचा के भीतर जाने से रोकती है।
1. त्वचा रोग विशेषज्ञ को जरूर दिखाएं। वह लेजर ट्रीटमेंट के जरिये भी यह समस्या दूर कर सकते हैं।
2. घरेलू उपाय में चोकर को दूध और गुलाबजल में मिलाकर हलके हाथों से प्रभावित स्थान पर मलें। फिर साफ पानी से धो लें।
अतिरिक्त तैलीयता
आपने दस मिनट पहले अपना चेहरा धोया और अब अगर आपको चेहरा चिकना लग रहा है तो स्पष्ट है कि आपकी त्वचा अत्यधिक तैलीय है। सर्द मौसम में तैलीय त्वचा तैलीय ग्रंथियों के सक्रिय होने के कारण अधिक तैलीय हो जाती है। लेकिन आप चिंता न करें और इन उपायों को अपनाएं।
क्या करें
1. आप लिक्विड मेकअप या प्रेस्ड पाउडर का इस्तेमाल करे। इसके अलावा चेहरा दिन में 2 बार लेमन या ऑरेंज युक्त साबुन से साफ करें।
2. एक बार सुबह और एक बार सोने से पहले चेहरा जरूर साफ करें या जब जरूरत हो तभी साफ करें लेकिन जरूरत से अधिक बार चेहरा साफ न करें। वरना त्वचा रूखेपन के कारण फटने लगेगी।
3. पानी व तरल पदार्थ अधिक से अधिक लें।
4. प्रोटीनयुक्त आहार लें, लेकिन अधिक सॉल्टी और तले-भुनें खाने से बचें। चॉकलेट और जंक फूड एकदम न खाएं।
5. नियमित फेशियल क्लींजिंग रुटीन अपनाएं।
6. डीप क्लींजिंग के लिए एस्ट्रिंजेंट लगाएं।
7. एक्सरसाइज करें व इस बात का ध्यान रखें कि उस दौरान आपने मेकअप न लगाया हो।
8. बार-बार चेहरा न छुएं।
9. अपने तकिये के कवर को हर रोज बदलें ताकि तैलीयता के कारण आपके छिद्र बंद न हो और संक्रमण न होने पाए।
10. त्वचा की अतिरिक्त तैलीयता हटाने के लिए मुलतानी मिट्टी का पैक हर दूसरे दिन लगाएं।
कम करें एक्ने
एक्ने टीनएज की सबसे बडी समस्या होती है। इस मौसम में तैलीय ग्रंथियां सक्रिय होने के कारण, आनुवांशिकता, तनाव और हार्मोस असंतुलन के कारण हेयर फॉलिक्स प्रभावित होते हैं जो एक्ने का सबसे बडा कारक बनते हैं। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
क्या करें
1. पर्याप्त एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार लें। फल और सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करें।
2. ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे सालमन या ताजा अलसी (फ्लेक्स सीड) का आटा उपयोग करें। पानी खूब पिएं ताकि शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकल जाएं और शरीर में पानी की कमी न होने पाए।
3. दिन में दो बार किसी माइल्ड शैंपू से चेहरा साफ करें।
4. गुलाबजल और खीरे के रस में चीनी मिलाकर चेहरे पर हलके हाथों से कुछ देर स्क्रब करें। फिर साफ पानी से धो लें। इसमें समय जरूर लगेगा, लेकिन लाभ निश्चित रूप से होगा।
5. सर्दियों में अमूमन स्त्रियां अपने बाल एक-दो दिन के अंतराल पर धोती हैं। वातावरण में नमी के दबाव और शुष्क हवाओं के कारण गंदे बालों पर डैंड्रफ पनपने लगती है। एक्ने होने का यह भी अहम कारण है, इसलिए बालों की सफाई का भी विशेष खयाल रखें।
घर पर बनाएं उपयोगी मास्क
1. हाथ धोने के बाद कुछ बूंदें नीबू का रस हाथों पर लगाएं। फिर धोकर पोंछ लें। सर्दियों में हाथों की त्वचा को नर्म मुलायम बनाने के लिए हैंड मास्क बनाकर लगाएं- 1 टेबल स्पून ग्लिसरीन, 2 टेबल स्पून एक्स्ट्रा-वर्जिन ऑलिव ऑयल, 1 नीबू का रस, 1 अंडे की जर्दी और थोडा गुलाबजल मिलाकर हाथों पर लगाएं। फिर मलकर छुडा लें। इसके अलावा उबले आलू को मसलकर थोडे से दूध में मिलाकर हाथों पर उबटन की तरह लगाएं।
2. इस मौसम में रूखी त्वचा के लिए एवोकैडो मास्क वरदान है। इसे बनाने के लिए एवोकैडो का गूदा निकालकर मसल लें। फिर उसमें एक्स्ट्रा वर्जिन ऑयल मिलाकर चेहरे पर लगाएं। नीचे से ऊपर की दिशा में घुमाते हुए छुडाएं। यह त्वचा को जरूरी पोषण प्रदान करता है। त्वचा के लिए महत्वपूर्ण विटमिंस, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट मिलता है और त्वचा नर्म-मुलायम बनी रहती है। ह्नबेजान त्वचा में जान डालने के लिए ताजे दही में बटरमिल्क, खट्टी क्रीम मिलाकर आंखों का हिस्सा छोडकर चेहरे पर लगाएं। 10-15 मिनट बाद चेहरा पानी से धो लें।
3. तैलीय त्वचा और बडे छिद्रों से निजात पाने के लिए एक अंडे की सफेदी को चेहरे पर आधे घंटे तक लगाएं फिर साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। यह मास्क त्वचा में कसाव लाने के साथ-साथ उसे स्वस्थ रखता है। यह कुदरती सुरक्षा कवच की तरह त्वचा की रक्षा करता है।
4. मिली-जुली त्वचा की देखभाल के लिए एक केले को मसलकर उसमें ताजा स्वीट क्रीम मिलाएं और चेहरे पर 30 मिनट तक लगाएं। यह त्वचा को नर्म, मुलायम बनाने के साथ ही नमी का संतुलन बनाएं रखता है।
यह भी ध्यान दें
1. गुनगुने पानी में ओटमील या बेकिंग सोडा मिलाकर नहाने से रूखी त्वचा नर्म मुलायम हो जाती है। नहाने के बाद सर्दियों में पर्याप्त मॉयस्चराइजर लगाना न भूलें। अगर मॉयस्चराइजर से भी काम न चलें तो लोशन का इस्तेमाल करें।
2. अगर आपकी त्वचा का रूखापन बढता ही जा रहा हो तो किसी भी प्रकार की पीलिंग, मास्क और एल्कोहॉल-बेस्ड टोनर्स या एस्टि्रंजेंट का इस्तेमाल भूल कर भी न करें। ये सभी त्वचा की कुदरती नमी चुरा लेते हैं। बजाय इसके आप क्लींजिंग मिल्क या माइल्ड फोमिंग क्लींजर, एल्कोहॉल रहित टोनर, डीपली हाइड्रेटिंग मास्क (बजाय मुलतानी मिट्टी बेस्ड) इस्तेमाल कर सकती हैं।
3. अपने घर में नमी का वातावरण बनाने के लिए हीटर के सामने एक प्लेट में पानी भरकर रखें ताकि हीटर की गर्मी से त्वचा शुष्क न होने पाए। चाहें तो पानी में थोडा सा रोज वॉटर डाल दें।
4. हफ्ते में एक बार हाथों को आराम देने के लिए हर्बल ऑयल मसाज करें। पानी में सेज, कैलेंडुला या कैमोमाइल डाल कर उबाल लें। हलका ठंडा होने पर हाथों को उस पानी में 10-15 मिनट तक डुबाएं। फिर धोकर सुखा लें और कोई हैंड स्पा क्रीम लगाकर हलका मसाज करें। या फिर आमंड ऑयल में कुछ बूंदें रोजमेरी एसेंशियल ऑयल की डालकर हाथों की कुछ देर मसाज करें।
5. रूखी त्वचा के लिए ऐसे स्किन केयर प्रोडक्ट चुनें जिनमें नैचरल हाइपोएलर्जेनिक चीजें हों।
6. सुबह नहाने के बाद वर्जिन कोकोनट ऑयल, कोको बटर या शीया बटर शरीर में लगाएं जिससे त्वचा को जरूरी पोषण मिले।
7। अत्यधिक रूखी त्वचा वाली स्त्रियों को नल के पानी से चेहरा साफ नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसमें क्लोरीन फ्लोराइड होती है। इसकी जगह पर मिनरल वॉटर, एल्कोहॉल फ्री क्लीनिंग लोशन या टोनर से चेहरा साफ करें।

पूनम मिश्रा की कलम से

सौंदर्य

सर्दियों का मौसम यूं तो बडा ही रूमानी होता है, लेकिन सौंदर्य की दृष्टि से उतना ही नुकसानदेह होता है। इस मौसम में त्वचा और सौंदर्य का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। दरअसल सर्द और शुष्क हवाएं त्वचा को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं, क्योंकि ये त्वचा की कुदरती नमी को चुरा लेती हैं। जिससे त्वचा खिंची-खिंची, रूखी और बेजान सी नजर आने लगती है। इस मौसम में त्वचा संबंधी कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं, लेकिन आप चाहें तो कुछ कारगर टिप्स और नियमित देखभाल से त्वचा की खोई हुई नमी और चमक को वापस लौटा सकती हैं।
सामान्य त्वचा
ऐसी त्वचा को क्लीनिंग, नरिशिंग और मॉयस्चराइजिंग की जरूरत होती है।
क्या करें
1. सुबह चेहरा धोने के बाद गुलाबजल या एल्कोहॉल फ्री एस्ट्रिंजेंट टॉनिक लगाकर चेहरे को ताजगी प्रदान करें। फिर माइल्ड नॉन-ग्रीसी क्रीम लगाकर जरूरी नमी प्रदान करें।
2. अच्छी क्वालिटी के मेकअप प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें। सोने से पहले मेकअप हटाना न भूलें। माइल्ड सोप से चेहरा साफ करें। उसके बाद ऑयल बेस्ड नरिशिंग क्रीम लगाएं। 15 मिनट बाद नैपकिन से चेहरा पोंछ लें।
3. हफ्ते में एक बार अंडे की जर्दी का मास्क या कोई और मॉयस्चरयुक्त मास्क लगाएं ताकि त्वचा पुनर्जीवित हो जाए।
रूखी त्वचा
रूखी त्वचा को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। आपको अपने लिए रिच स्किन केयर प्रोडक्ट चुनने चाहिए जैसे शीया बटर, एक्स्ट्रा-वर्जिन कोकोनट ऑयल या होममेड हर्बल ऑयल।
1. इन्हें हफ्ते में दो बार चेहरे पर लगाएं।
2. अगर रूखे पैचेज चेहरे पर होने लगे या त्वचा फटने लगे तो एक चम्मच ग्लिसरीन में एक चम्मच गुलाबजल मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएं। फिर कॉटन को गीला करके निचोडें और हलके हाथों से मलकर लगाएं। ऐसा नियमित रूप से तब तक करें जब तक कि त्वचा साफ और चिकनी न हो जाए। पानी से धोने के बाद मॉयस्चराइजर लगाएं।
तैलीय त्वचा
आपको अपनी त्वचा को पोषण देने के साथ ही बडे छिद्रों को साफ करने, नमी प्रदान करने और एक्ने से बचाने के लिए अतिरिक्त ऑयल को कम करने पर ध्यान देना जरूरी है। इसलिए इन उपायों को अपनाएं।
क्या करें
1. त्वचा को दिन में 2-3 बार धोएं, लेकिन माइल्ड सोप का केवल एक बार ही प्रयोग करें। वरना तैलीय ग्रंथियां सक्रिय होकर अत्यधिक सीबम बनाने लगेंगी।
2. हमेशा नॉन ग्रीसी मॉयस्चराइजर इस्तेमाल करें और एल्कोहॉल फ्री हर्बल टॉनिक से चेहरे को टोन करें, जो त्वचा का स्वास्थ्य और नमी का संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।
3. हफ्ते में एक बार 10 मिनट तक ठंडे पानी से चेहरा खूब अच्छी तरह धोएं।
4. अगर एक्ने की समस्या है तो अपनी डाइट से चीनी और कार्बोहाइड्ेट निकाल दें।
मिली-जुली त्वचा
ऐसी त्वचा की देखभाल करना थोडा मुश्किल होता है, क्योंकि यह तैलीय और रूखी दोनों ही होती है। इन दोनों ही स्थितियों में अलग-अलग ध्यान देना पडता है। फेशियल हिस्से (माथा और नाक) के लिए ऑयली ट्रीटमेंट करें और आंखों और गालों के लिए रूखी त्वचा वाला ट्रीटमेंट करें।
क्या करें
1. दिन में एक बार माइल्ड फेशियल सोप या क्लींजर से चेहरा साफ करें।
2. क्लीनिक कंपनी का टोनर तैलीय हिस्सों पर लगाएं।
3. टी-जोन हिस्से पर लाइट मॉयस्चराइजर लगाएं ताकि छिद्र बंद न होने पाएं।
4. मॉयस्चराइजर लगाने के बाद मैट-फिनिश प्राइमर लगाएं। यह आपके टी-जोन को शाइन फ्री रखेगा।
5. खुले और बडे छिद्रों को कम करने के लिए हफ्ते में एक बार ऑयली स्किन के लिए बना मास्क और स्क्रब अपने माथे, गाल और नाक पर लगाएं।
संवेदनशील त्वचा
ऐसी त्वचा हमेशा रूखी और समस्या युक्त होती है। इसलिए विशेष देखभाल बहुत जरूरी है।
क्या करें
1. इस बात पर विशेष ध्यान दें कि आप क्या खा रही हैं। विशेषकर फैटी एसिड, ऑर्गेनिक प्रोटीन, दही और लैक्टो फर्मेटेड फ्रूटस (रुड्डष्ह्लश्र-स्नद्गह्मद्वद्गठ्ठह्लद्गस्त्र स्नह्मह्वद्बह्लह्य) और सब्जियों में आप कितना और क्या ले रही हैं।
2. ऐसे प्रोडक्ट न इस्तेमाल करें जिनमें पेट्रोलियम की मात्रा हो। नैचरल या ऑर्गेनिक स्किन केयर रेंज लें।
3. वही खाएं जो आपको सूट करता हो ताकि एलर्जी की समस्या न होने पाए।
4. त्वचा को धूप के सीधे संपर्क में आने से बचाएं। धूप में निकलने से पहले ऑर्गेनिक सनस्क्रीन एसपीएफ 30 या उससे अधिक लगाएं।
खूबसूरत पैरों के लिए
अमूमन स्त्रियां अपने पैरों के सौंदर्य को नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन पैर हमारे शरीर का पूरा भार उठाते-उठाते थक जाते हैं। कभी उन्हें हाई हील पर तनना पडता है तो कभी टाइट स्ट्रैप के साथ दबना पडता है। दिन खत्म होते-होते पैर थक कर चूर हो चुके होते हैं। सर्द मौसम का प्रभाव पैरों पर भी पडता है। एडियां फटना सर्दियों की सबसे अहम समस्या होती है। ऐसे में बेहतर फुट स्पा से पैरों को आराम और सौंदर्य दोनों दिया जा सकता है।
क्या करें
1. हर दूसरे दिन पर रात में सोने से पहले हलके गर्म पानी में नमक डालकर अपने पैरों को दस-पंद्रह मिनट तक डुबोएं। फिर अच्छी तरह पोंछकर फुटक्रीम लगाएं।
2. रोजाना अपने पैरों में खूब अच्छी तरह मॉयस्चराइजर, लोशन या फुटक्रीम लगाकर कुछ देर गोलाई में हाथ घुमाते हुए मालिश करें। ताकि पैरों की त्वचा कोमल बनी रहे।
3. पैरों के नाखूनों का आकर्षण बढाने के लिए नेलकलर लगाएं। इसके लिए टो-नेल सेपरेटर का प्रयोग करें। ताकि नेलपॉलिश एक-दूसरे से टच न हो। अगर आपके पास टो-नेल सेपरेटर नहीं है तो टिश्यू पेपर को रोल करके प्रत्येक उंगली के बीच में लगाएं।
4. नाखूनों का स्वाभाविक रंग पीला न पड जाए इससे बचने के लिए उस पर बेस कोट लगाएं।
5. जब भी कभी अपना पसंदीदा कार्यक्रम देखें, अपनी स्पा किट निकालें और पैरों को गर्म पानी के टब में डालकर बैठ जाएं।
चेहरे के दाग
यह पिग्मेंटेशन का बिगडा हुआ रूप होते हैं। साथ ही यह धूप के संपर्क में आने से बढ जाते हैं। दरअसल सर्दियों में स्त्रियां अकसर धूप से सुरक्षा के उपाय कम ही अपनाती हैं जिस कारण यह समस्या बढ जाती है। गोरी त्वचा पर फे्रकल्स जल्दी पडते हैं क्योंकि उसमें मेलानिन की कमी के कारण त्वचा यूवी किरणों को जल्दी जज्ब कर लेती है। इस तरह त्वचा पर दाग बढ जाते हैं।
क्या करें
ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन रोजाना लगाएं। ऐसे प्रोडक्ट्स चुनें जिनमें जिंक ऑक्साइड, टिर्टेनियम डाइऑक्साइड हो। यह तत्व यूवीए और यूवीबी दोनों किरणों को त्वचा के भीतर जाने से रोकती है।
1. त्वचा रोग विशेषज्ञ को जरूर दिखाएं। वह लेजर ट्रीटमेंट के जरिये भी यह समस्या दूर कर सकते हैं।
2. घरेलू उपाय में चोकर को दूध और गुलाबजल में मिलाकर हलके हाथों से प्रभावित स्थान पर मलें। फिर साफ पानी से धो लें।
अतिरिक्त तैलीयता
आपने दस मिनट पहले अपना चेहरा धोया और अब अगर आपको चेहरा चिकना लग रहा है तो स्पष्ट है कि आपकी त्वचा अत्यधिक तैलीय है। सर्द मौसम में तैलीय त्वचा तैलीय ग्रंथियों के सक्रिय होने के कारण अधिक तैलीय हो जाती है। लेकिन आप चिंता न करें और इन उपायों को अपनाएं।
क्या करें
1. आप लिक्विड मेकअप या प्रेस्ड पाउडर का इस्तेमाल करे। इसके अलावा चेहरा दिन में 2 बार लेमन या ऑरेंज युक्त साबुन से साफ करें।
2. एक बार सुबह और एक बार सोने से पहले चेहरा जरूर साफ करें या जब जरूरत हो तभी साफ करें लेकिन जरूरत से अधिक बार चेहरा साफ न करें। वरना त्वचा रूखेपन के कारण फटने लगेगी।
3. पानी व तरल पदार्थ अधिक से अधिक लें।
4. प्रोटीनयुक्त आहार लें, लेकिन अधिक सॉल्टी और तले-भुनें खाने से बचें। चॉकलेट और जंक फूड एकदम न खाएं।
5. नियमित फेशियल क्लींजिंग रुटीन अपनाएं।
6. डीप क्लींजिंग के लिए एस्ट्रिंजेंट लगाएं।
7. एक्सरसाइज करें व इस बात का ध्यान रखें कि उस दौरान आपने मेकअप न लगाया हो।
8. बार-बार चेहरा न छुएं।
9. अपने तकिये के कवर को हर रोज बदलें ताकि तैलीयता के कारण आपके छिद्र बंद न हो और संक्रमण न होने पाए।
10. त्वचा की अतिरिक्त तैलीयता हटाने के लिए मुलतानी मिट्टी का पैक हर दूसरे दिन लगाएं।
कम करें एक्ने
एक्ने टीनएज की सबसे बडी समस्या होती है। इस मौसम में तैलीय ग्रंथियां सक्रिय होने के कारण, आनुवांशिकता, तनाव और हार्मोस असंतुलन के कारण हेयर फॉलिक्स प्रभावित होते हैं जो एक्ने का सबसे बडा कारक बनते हैं। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
क्या करें
1. पर्याप्त एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार लें। फल और सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करें।
2. ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे सालमन या ताजा अलसी (फ्लेक्स सीड) का आटा उपयोग करें। पानी खूब पिएं ताकि शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकल जाएं और शरीर में पानी की कमी न होने पाए।
3. दिन में दो बार किसी माइल्ड शैंपू से चेहरा साफ करें।
4. गुलाबजल और खीरे के रस में चीनी मिलाकर चेहरे पर हलके हाथों से कुछ देर स्क्रब करें। फिर साफ पानी से धो लें। इसमें समय जरूर लगेगा, लेकिन लाभ निश्चित रूप से होगा।
5. सर्दियों में अमूमन स्त्रियां अपने बाल एक-दो दिन के अंतराल पर धोती हैं। वातावरण में नमी के दबाव और शुष्क हवाओं के कारण गंदे बालों पर डैंड्रफ पनपने लगती है। एक्ने होने का यह भी अहम कारण है, इसलिए बालों की सफाई का भी विशेष खयाल रखें।
घर पर बनाएं उपयोगी मास्क
1. हाथ धोने के बाद कुछ बूंदें नीबू का रस हाथों पर लगाएं। फिर धोकर पोंछ लें। सर्दियों में हाथों की त्वचा को नर्म मुलायम बनाने के लिए हैंड मास्क बनाकर लगाएं- 1 टेबल स्पून ग्लिसरीन, 2 टेबल स्पून एक्स्ट्रा-वर्जिन ऑलिव ऑयल, 1 नीबू का रस, 1 अंडे की जर्दी और थोडा गुलाबजल मिलाकर हाथों पर लगाएं। फिर मलकर छुडा लें। इसके अलावा उबले आलू को मसलकर थोडे से दूध में मिलाकर हाथों पर उबटन की तरह लगाएं।
2. इस मौसम में रूखी त्वचा के लिए एवोकैडो मास्क वरदान है। इसे बनाने के लिए एवोकैडो का गूदा निकालकर मसल लें। फिर उसमें एक्स्ट्रा वर्जिन ऑयल मिलाकर चेहरे पर लगाएं। नीचे से ऊपर की दिशा में घुमाते हुए छुडाएं। यह त्वचा को जरूरी पोषण प्रदान करता है। त्वचा के लिए महत्वपूर्ण विटमिंस, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट मिलता है और त्वचा नर्म-मुलायम बनी रहती है। ह्नबेजान त्वचा में जान डालने के लिए ताजे दही में बटरमिल्क, खट्टी क्रीम मिलाकर आंखों का हिस्सा छोडकर चेहरे पर लगाएं। 10-15 मिनट बाद चेहरा पानी से धो लें।
3. तैलीय त्वचा और बडे छिद्रों से निजात पाने के लिए एक अंडे की सफेदी को चेहरे पर आधे घंटे तक लगाएं फिर साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। यह मास्क त्वचा में कसाव लाने के साथ-साथ उसे स्वस्थ रखता है। यह कुदरती सुरक्षा कवच की तरह त्वचा की रक्षा करता है।
4. मिली-जुली त्वचा की देखभाल के लिए एक केले को मसलकर उसमें ताजा स्वीट क्रीम मिलाएं और चेहरे पर 30 मिनट तक लगाएं। यह त्वचा को नर्म, मुलायम बनाने के साथ ही नमी का संतुलन बनाएं रखता है।
यह भी ध्यान दें
1. गुनगुने पानी में ओटमील या बेकिंग सोडा मिलाकर नहाने से रूखी त्वचा नर्म मुलायम हो जाती है। नहाने के बाद सर्दियों में पर्याप्त मॉयस्चराइजर लगाना न भूलें। अगर मॉयस्चराइजर से भी काम न चलें तो लोशन का इस्तेमाल करें।
2. अगर आपकी त्वचा का रूखापन बढता ही जा रहा हो तो किसी भी प्रकार की पीलिंग, मास्क और एल्कोहॉल-बेस्ड टोनर्स या एस्टि्रंजेंट का इस्तेमाल भूल कर भी न करें। ये सभी त्वचा की कुदरती नमी चुरा लेते हैं। बजाय इसके आप क्लींजिंग मिल्क या माइल्ड फोमिंग क्लींजर, एल्कोहॉल रहित टोनर, डीपली हाइड्रेटिंग मास्क (बजाय मुलतानी मिट्टी बेस्ड) इस्तेमाल कर सकती हैं।
3. अपने घर में नमी का वातावरण बनाने के लिए हीटर के सामने एक प्लेट में पानी भरकर रखें ताकि हीटर की गर्मी से त्वचा शुष्क न होने पाए। चाहें तो पानी में थोडा सा रोज वॉटर डाल दें।
4. हफ्ते में एक बार हाथों को आराम देने के लिए हर्बल ऑयल मसाज करें। पानी में सेज, कैलेंडुला या कैमोमाइल डाल कर उबाल लें। हलका ठंडा होने पर हाथों को उस पानी में 10-15 मिनट तक डुबाएं। फिर धोकर सुखा लें और कोई हैंड स्पा क्रीम लगाकर हलका मसाज करें। या फिर आमंड ऑयल में कुछ बूंदें रोजमेरी एसेंशियल ऑयल की डालकर हाथों की कुछ देर मसाज करें।
5. रूखी त्वचा के लिए ऐसे स्किन केयर प्रोडक्ट चुनें जिनमें नैचरल हाइपोएलर्जेनिक चीजें हों।
6. सुबह नहाने के बाद वर्जिन कोकोनट ऑयल, कोको बटर या शीया बटर शरीर में लगाएं जिससे त्वचा को जरूरी पोषण मिले।
7। अत्यधिक रूखी त्वचा वाली स्त्रियों को नल के पानी से चेहरा साफ नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसमें क्लोरीन फ्लोराइड होती है। इसकी जगह पर मिनरल वॉटर, एल्कोहॉल फ्री क्लीनिंग लोशन या टोनर से चेहरा साफ करें।

पूनम मिश्रा की कलम से

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